Dhanteras पर सोना खरीदना परंपरा हो सकती है, लेकिन निवेश के नजरिए से फिजिकल ज्वेलरी महंगी पड़ती है। मेकिंग चार्जेस और टैक्स के कारण रिटर्न पर असर पड़ता है। डिजिटल गोल्ड और Gold ETF बेहतर विकल्प हैं, लेकिन ध्यान रहे कि अक्टूबर 2026 से कई फंड हाउसों ने Gold FoFs में फ्रेश निवेश पर रोक लगा दी है।
धनतेरस नजदीक है और घरों में सोने की खरीदारी की तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि, फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि गहने पहनना और सोने में निवेश करना दो अलग चीजें हैं। यदि आप निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं, तो इसकी छिपी हुई लागत (Hidden Costs) को समझना जरूरी है।
फिजिकल ज्वेलरी में क्यों है रिस्क?
जब आप फिजिकल ज्वेलरी खरीदते हैं, तो आप केवल सोने की कीमत नहीं चुकाते, बल्कि 3% से लेकर 25% तक मेकिंग और वेस्टेज चार्जेस भी देते हैं। इसके अलावा, कुल रकम पर 3% GST भी लगता है। यह आपकी पूंजी का तुरंत नुकसान है, क्योंकि जब आप इसे बेचने जाएंगे, तो ज्वैलर्स ये मेकिंग चार्जेस काट लेते हैं।
Gold ETF: एक बेहतर विकल्प
Gold ETF शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं, जिससे आप गोल्ड को बाजार भाव पर खरीद सकते हैं। इसमें कोई मेकिंग चार्ज या स्टोरेज का झंझट नहीं होता। यहाँ केवल मामूली ब्रोकरेज फीस और एनुअल एक्सपेंस रेश्यो लगता है, जो इसे वेल्थ क्रिएशन के लिए अधिक पारदर्शी और सस्ता जरिया बनाता है।
Gold Fund-of-Funds (FoFs) में बदलाव
अगर आप म्यूचुअल फंड के जरिए गोल्ड में निवेश करते हैं, तो एक जरूरी अपडेट है। 16 अक्टूबर 2026 से कई म्यूचुअल फंड हाउसों ने अपने Gold ETF FoFs में नए सब्सक्रिप्शन, SIP और लम्पसम निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह कदम रेगुलेटरी गाइडलाइन्स के तहत उठाया गया है। बिना डीमैट अकाउंट वाले निवेशकों के लिए अब विकल्प सीमित हो गए हैं, इसलिए निवेश से पहले अपने ब्रोकर या फंड हाउस की वेबसाइट पर स्टेटस जरूर चेक करें।
टैक्स का गणित
टैक्सेशन के मामले में भी Gold ETF फिजिकल गोल्ड से बेहतर हैं। लिस्टेड सिक्योरिटीज के नियमों के तहत टैक्स लगने से यहाँ रिटर्न बेहतर मिल सकता है, जबकि फिजिकल गोल्ड पर अक्सर आपकी पर्सनल टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। निष्कर्ष साफ है—त्योहारों पर गहने पहनें, लेकिन निवेश के लिए गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को चुनें।
