Dhanteras पर सोना खरीदते समय केवल चमक नहीं, टैक्स के नियम भी समझें। **12.5%** का LTCG टैक्स, फिजिकल गोल्ड, ETF और SGB के बीच का अंतर समझना जरूरी है ताकि ITR फाइलिंग में कोई परेशानी न हो।
टैक्स और होल्डिंग पीरियड का गणित
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी अपडेट यह है कि अब अधिकांश गोल्ड एसेट्स पर 12.5% का फ्लैट लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगता है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इसमें अब 'इंडेक्सेशन' का फायदा नहीं मिलेगा। अगर आप फिजिकल गोल्ड या गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स को 24 महीने से ज्यादा होल्ड करते हैं, तो यह लॉन्ग-टर्म माना जाएगा। वहीं, गोल्ड ETFs के लिए यह सीमा 12 महीने है। याद रखें, इक्विटी शेयर्स में मिलने वाली ₹1.25 लाख की LTCG छूट गोल्ड पर नहीं मिलती है।
Sovereign Gold Bonds (SGB) का सच
SGB पर मिलने वाला 2.5% का सालाना ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट केवल उन्हीं लोगों को मिलती है जिन्होंने इसे सीधे इश्यू के समय सब्सक्राइब किया था। अगर आप SGB को सेकेंडरी मार्केट से खरीदते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपको यह टैक्स छूट नहीं मिलेगी और आपको सामान्य कैपिटल गेन्स नियमों के तहत टैक्स देना होगा।
जरूरी डॉक्यूमेंटेशन और compliance
गोल्ड खरीदते समय बिल जरूर संभालें। फिजिकल गोल्ड पर 3% GST और मेकिंग चार्ज पर 5% GST लगता है। ये इनवॉइस ही आपकी खरीद की लागत (Cost of acquisition) का सबूत होते हैं। आईटीआर (ITR-2) फाइल करते समय 'Schedule CG' में ट्रांजैक्शन की जानकारी देना अनिवार्य है।
गोल्ड लिमिट और जब्त होने का डर
हालांकि सोना खरीदने की कोई कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन छापेमारी के दौरान अधिकारियों के पास कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं: विवाहित महिलाओं के लिए 500 ग्राम, अविवाहित महिलाओं के लिए 250 ग्राम और पुरुषों के लिए 100 ग्राम सोने पर सामान्यतः कोई कार्रवाई नहीं होती। अगर आपके पास इससे ज्यादा सोना है, तो विरासत (Inheritance) या गिफ्ट डीड जैसे दस्तावेज तैयार रखें ताकि आप सोने का स्रोत साबित कर सकें।
