Deccan Gold Mines ने अपने विस्तार की बड़ी योजना का ऐलान किया है। कंपनी ने FY28 तक गोल्ड प्रोडक्शन को **750kg** तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए Jonnagiri माइन में अंडरग्राउंड माइनिंग शुरू की जाएगी। इस बड़े विस्तार और ग्लोबल एक्सप्लोरेशन के लिए कंपनी **₹2,500 करोड़** जुटाने की तैयारी में है।
Deccan Gold Mines ने भारत में अपना गोल्ड प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए एक आक्रामक रणनीति तैयार की है। कंपनी अपनी Jonnagiri माइन में मौजूदा ओपन-पिट माइनिंग से शिफ्ट होकर अंडरग्राउंड माइनिंग पर फोकस करेगी।
अंडरग्राउंड माइनिंग और लक्ष्य
इस बदलाव का मकसद हाई-ग्रेड रिजर्व तक पहुंच बनाना है। कंपनी को उम्मीद है कि ओर ग्रेड (ore grades) मौजूदा 2 ग्राम प्रति टन से बढ़कर 3 से 3.5 ग्राम प्रति टन हो जाएगा। इस प्रक्रिया में नए शाफ्ट बनाने और प्रोसेसिंग कैपेसिटी को 2,500 टन तक बढ़ाने का काम होगा। इसमें करीब 4 साल का समय लग सकता है, जिसके दौरान सालाना उत्पादन 300kg के स्तर पर स्थिर रहने का अनुमान है।
फंड जुटाने की चुनौती और रिस्क
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को अगले 2 से 3 वर्षों में ₹2,500 करोड़ की भारी-भरकम पूंजी की जरूरत होगी। कंपनी डेट (Debt) और इक्विटी (Equity) जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इतनी बड़ी रकम जुटाने से इक्विटी डाइल्यूशन का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, मिनरल एक्सप्लोरेशन में अनिश्चितता बनी रहती है और भविष्य के नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि ये प्रोजेक्ट्स कमर्शियली कितने सफल होते हैं।
ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन
भारत के बाहर भी कंपनी ने हाथ पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। स्पेन में टंगस्टन (Tungsten) की खोज, मोजाम्बिक में लिथियम डिपॉजिट की तलाश और किर्गिस्तान में टेलिंग्स से वैल्यू निकालने पर काम चल रहा है। इसके अलावा, फिनलैंड में भी ड्रिलिंग ऑपरेशंस की योजना है, जिससे 2029-30 तक प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य है। शेयरधारकों के लिए अब फंडिंग का तरीका और इन ग्लोबल प्रोजेक्ट्स की सफलता ही सबसे बड़े 'मॉनिटरेबल' होंगे।
