ग्लोबल डायमंड माइनिंग दिग्गज De Beers अब अपना पूरा फोकस भारत पर शिफ्ट कर रही है। चीन में सुस्त मांग और लैब-ग्रोन डायमंड्स की चुनौती के बीच, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेचुरल डायमंड कंज्यूमर बनकर उभरा है।
भारत क्यों है फोकस में?
नेचुरल डायमंड की कीमतों में कोविड के बाद के हाई से 20-30% तक की गिरावट के बाद, अब बाजार में स्टेबिलिटी लौट रही है। इसी के चलते De Beers भारत को अपना सबसे अहम बाजार मान रही है। भारत ने चीन को पीछे छोड़कर अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेचुरल डायमंड ज्वेलरी हब बनने का गौरव हासिल किया है।
वित्तीय संकट और चुनौतियां
निवेशकों को यह समझना होगा कि De Beers भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। इसकी 85% हिस्सेदारी Anglo American के पास है, जो इस बिजनेस को बेचने या अलग करने (spin-off) पर विचार कर रही है। कंपनी भारी दबाव में है, जिसने 2026 की पहली छमाही में $188 मिलियन का नेट लॉस रिपोर्ट किया है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कुल $6.8 बिलियन का राइट-डाउन किया है। कैश बचाने के लिए कंपनी ने साउथ अफ्रीका में अपनी Venetia माइन में 2 साल के लिए प्रोडक्शन तक रोक दिया है।
लैब-ग्रोन डायमंड्स का खतरा
नेचुरल डायमंड्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'लैब-ग्रोन डायमंड्स' हैं। इनकी सस्ती कीमत नेचुरल स्टोन्स के मार्जिन पर दबाव डाल रही है। हालांकि, De Beers नेचुरल डायमंड्स की वैल्यू को लेकर मार्केटिंग पर जोर दे रही है, लेकिन कंज्यूमर प्रेफरेंस धीरे-धीरे बदल रही है।
भारत का ग्रोथ आउटलुक
भारतीय मार्केट की वैल्यू 2024 में ₹785 अरब थी, जिसके 2030 तक ₹1.5 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह 12% की CAGR ग्रोथ है, जिसे Gen Z और मिलेनियल्स आगे बढ़ा रहे हैं। अब ज्वेलरी सिर्फ शादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि डेली-वियर और सेल्फ-परचेजिंग का चलन बढ़ा है।
Titan, Kalyan Jewellers और Senco Gold जैसे भारतीय रिटेलर्स के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेचुरल वर्सेज लैब-ग्रोन डायमंड्स का मिक्स उनके शोरूम्स में कैसे बदलता है।
