Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने चीनी मिलों को बड़ी राहत देते हुए कच्चे चीनी के इम्पोर्ट कोटा को सरेंडर करने की डेडलाइन **30 सितंबर, 2026** तक बढ़ा दी है।
बाजार की बदलती गणित
सरकार ने अगस्त 2026 में घरेलू खुदरा कीमतों को काबू में रखने के लिए 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इम्पोर्ट की स्कीम शुरू की थी। हालांकि, अब बाजार की स्थितियां बदल गई हैं। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में नरमी आई है, जबकि ग्लोबल मार्केट में भाव ऊपर चढ़ गए हैं। इस वजह से इम्पोर्ट करना अब मिलों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गया है।
नियमों में मिली मोहलत
मौजूदा नियमों के मुताबिक, अगर कोई मिल अपना कोटा इस्तेमाल नहीं करती है, तो उसे सरेंडर किया जा सकता है। इसके लिए मिलों को अनयूटिलाइज्ड क्वांटिटी की CIF वैल्यू का 0.5% जुर्माना देना होगा। इस डेडलाइन के बढ़ने से मिलों को अपना स्टॉक और लॉजिस्टिक्स मैनेज करने के लिए अतिरिक्त वक्त मिल जाएगा, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
उत्पादन और सप्लाई पर असर
शुगर सेक्टर के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के सीजन के लिए उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन से घटाकर अब 306 लाख टन कर दिया गया है। फसल में बीमारी लगने के कारण उत्पादन में यह गिरावट आई है। साथ ही, 30 सितंबर, 2026 तक चीनी के निर्यात पर भी पाबंदी है, जिससे मिलों के पास सरप्लस को मैनेज करने के सीमित विकल्प हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आने वाले त्योहारों (दशहरा और दिवाली) के दौरान मांग बढ़ेगी, जिस पर सरकार की नजर है। निवेशकों को स्टॉक-होल्डिंग लिमिट, एक्सपोर्ट रिस्ट्रिक्शंस और एथेनॉल ब्लेंडिंग मैंडेट जैसे फैक्टर्स पर खास ध्यान रखने की जरूरत है। मार्केट यह भी देखेगा कि अंत में कुल 10 लाख टन के कोटा में से कितना सरेंडर किया जाता है, जो मिलों की मौजूदा सप्लाई स्थिति को दर्शाएगा।
