Crude Oil Price: खाड़ी देशों में नरमी और कमजोर डिमांड के बीच क्रूड ऑयल में गिरावट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Crude Oil Price: खाड़ी देशों में नरमी और कमजोर डिमांड के बीच क्रूड ऑयल में गिरावट

27 अगस्त, 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कूटनीतिक प्रगति के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में दबाव देखा गया। अमेरिका में गैसोलीन इन्वेंट्री घटने के बावजूद, कमजोर एनर्जी डिमांड का असर वैश्विक और घरेलू मार्केट पर पड़ रहा है।

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच निवेशकों ने अपनी पोजीशन में बदलाव किया है, जिससे गुरुवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें गिरकर $87.24 प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $82 के स्तर से नीचे $81.67 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। यह गिरावट उस 'रिस्क प्रीमियम' के हटने का संकेत है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सप्लाई बाधित होने के डर से बना हुआ था।

कूटनीति का बाजार पर असर

ईरान और ओमान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत ने ट्रेडर्स को थोड़ी राहत दी है। इस मार्ग के नियमन को लेकर हो रही चर्चाओं ने सप्लाई-साइड के डर को कम किया है। जब भू-राजनीतिक तनाव ठंडा पड़ता है, तो कच्चे तेल को 'सेफ हेज' (सुरक्षित निवेश) के रूप में रखने की जल्दबाजी कम हो जाती है, जिससे कीमतों में गिरावट आती है।

अमेरिकी इन्वेंट्री और डिमांड की चिंता

यूनाइटेड स्टेट्स एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) की ताजा रिपोर्ट मिली-जुली रही है। हालांकि कमर्शियल क्रूड इन्वेंट्री में 0.1 मिलियन बैरल की मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन रिफाइंड प्रोडक्ट्स का स्टॉक तेजी से घटा है। गैसोलीन और डिस्टिलेट इन्वेंट्री में क्रमशः 2.5 मिलियन और 2.2 मिलियन बैरल की कमी देखी गई है। इसके बावजूद, निवेशकों की चिंता डिमांड को लेकर है। अमेरिका में पिछले चार हफ्तों में कुल फ्यूल सप्लाई पिछले साल की तुलना में 3% कम रही है, जो वैश्विक स्तर पर फ्यूल की मांग घटने की ओर इशारा करती है।

भारतीय बाजार पर असर

घरेलू बाजार में भी यही रुझान देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 0.75% गिरकर ₹7,838 पर कारोबार कर रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए क्रूड की यह अस्थिरता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के इंपोर्ट बिल और देश में महंगाई (विशेषकर एनर्जी और ट्रांसपोर्ट) पर सीधा असर डालती है।

फिलहाल, बाजार नाजुक स्थिति में है। मुख्य रिस्क यह है कि क्षेत्रीय स्थिति बहुत डायनामिक है; यदि बातचीत विफल होती है, तो कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है। साथ ही, अमेरिका में मांग का धीमा होना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.