Crude Oil और Gold में बड़ा बदलाव: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, सोना हुआ महंगा

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Crude Oil और Gold में बड़ा बदलाव: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, सोना हुआ महंगा

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने से कीमतें नरम हुई हैं, वहीं अमेरिका में कमजोर जॉब डेटा के कारण सोने के भाव में तेजी आई है। भारतीय निवेशकों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है, लेकिन बाजार के जोखिम अभी भी बरकरार हैं।

ग्लोबल ऑयल मार्केट में इस हफ्ते नरमी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के वायदा भाव $101.90 प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $90.49 के आसपास सेटल हुए हैं। इस गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट से एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और G7 देशों द्वारा रणनीतिक भंडार जारी करना है, जिससे सप्लाई की चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

भारत के लिए क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बेहद महत्वपूर्ण है। चूंकि भारत कच्चा तेल बड़े पैमाने पर इम्पोर्ट करता है, इसलिए बढ़ती कीमतें रुपये पर दबाव डालती हैं और महंगाई को बढ़ावा देती हैं। हालांकि, अभी तेल की कीमतों में आई कमी ट्रेड बैलेंस और कंपनियों के मुनाफे के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित जोखिमों के कारण बाजार अभी भी नाजुक स्थिति में है।

सोने की चमक और फेड का रुख

जहां तेल की कीमतें दबाव में हैं, वहीं प्रीशियस मेटल्स को अमेरिका के मैक्रोइकोनॉमिक बदलावों से मजबूती मिली है। अमेरिका में हालिया नॉन-फार्म पेरोल डेटा उम्मीद से काफी कमजोर रहा है। लेबर मार्केट में इस सुस्ती के कारण ट्रेडर्स अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रणनीति को लेकर नए सिरे से सोच रहे हैं। ब्याज दरों में सख्ती की आशंका कम होने से सोने जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट को फायदा मिला है और सोना $4,158 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है।

मार्केट सेंटीमेंट और FII का रुख

ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की यह हलचल भारतीय शेयर बाजार को भी प्रभावित कर रही है। पिछले कुछ हफ्तों में Sensex और Nifty छह महीने के निचले स्तरों के आसपास संघर्ष कर रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का पैसा निकालने के पीछे मुख्य वजह महंगे तेल और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड रही है। हालांकि तेल में आई गिरावट से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन अमेरिकी डॉलर की मजबूती उभरते बाजारों के लिए चुनौती बनी हुई है। निवेशकों को अब घरेलू महंगाई के आंकड़ों और बॉन्ड यील्ड पर अपनी नजर बनाए रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.