Crude Oil: सप्लाई रूट खुलने के बाद भी नहीं घट रहे कच्चे तेल के दाम, भारतीय बाजार पर बढ़ा दबाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
Crude Oil: सप्लाई रूट खुलने के बाद भी नहीं घट रहे कच्चे तेल के दाम, भारतीय बाजार पर बढ़ा दबाव

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें उम्मीद के विपरीत ऊंची बनी हुई हैं, जबकि प्रमुख शिपिंग रूट्स भी खुल चुके हैं। भारत जैसे बड़े इंपोर्टर के लिए यह महंगाई और कॉर्पोरेट प्रॉफिट पर सीधा असर डाल रहा है।

अमूमन जब बड़े शिपिंग रूट्स दोबारा खुलते हैं, तो सप्लाई चेन की चिंताएं कम होने से क्रूड ऑयल के दाम घटने लगते हैं। लेकिन इस बार मार्केट में वैसी गिरावट नहीं दिख रही है। अब निवेशक इसे सिर्फ एक अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम मानकर चल रहे हैं।

कीमतें क्यों बनी हैं ऊंची?

इसकी सबसे बड़ी वजह है ग्लोबल लेवल पर तेल के कम होते स्टॉक। जब भंडार कम होते हैं, तो मार्केट किसी भी छोटी खबर पर बहुत तेजी से रिएक्ट करता है। ट्रेडर्स अब 'जियोपोलिटिकल रिस्क प्रीमियम' को भी कीमतों में जोड़कर देख रहे हैं। आसान भाषा में कहें तो भविष्य में संघर्ष की आशंका के कारण दाम निचले स्तरों पर आने के बजाय ऊंचे ही बने हुए हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर मार

भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। तेल महंगा होने से देश को ईंधन के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है और करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का दायरा भी बढ़ सकता है। अगर यह स्थिति बनी रही, तो घरेलू महंगाई को काबू में रखना सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगा।

कंपनियों के मार्जिन पर खतरा

पेंट्स, केमिकल्स, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स के लिए कच्चा तेल एक मुख्य रॉ मटेरियल है। अगर तेल महंगा रहता है, तो इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। यदि ये कंपनियां अपना बढ़ा हुआ खर्चा ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए भी ग्लोबल दाम और सरकार द्वारा तय ईंधन कीमतों के बीच तालमेल बिठाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

अगला अहम कदम ग्लोबल एनर्जी कार्टेल्स का प्रोडक्शन फैसला होगा। इसके अलावा, अमेरिका के ऑयल रिजर्व्स के आंकड़े भी मार्केट की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को अब अलग-अलग कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे इस बढ़ती इनपुट कॉस्ट को मैनेज कर रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी कंपनियां मुश्किल हालात में भी अपना मार्जिन बचा पाने में कामयाब रहती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.