Brent crude की कीमतें गिरकर **$95** प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, हालांकि ग्लोबल इन्वेंटरी अभी भी **15 साल** के निचले स्तर पर बनी हुई है।
अमेरिकी चुनाव के नतीजों का असर अब ग्लोबल कमोडिटी मार्केट पर दिखने लगा है। 5 नवंबर, 2026 तक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। मार्केट सेंटीमेंट पूरी तरह से डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत पर केंद्रित है, जिसने हाउस और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि अब अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक समाधान पर जोर देगा।\n\nइस उम्मीद के चलते Brent crude $95 प्रति बैरल के नीचे आ गया है, जबकि US West Texas Intermediate (WTI) $87 प्रति बैरल के पास कारोबार कर रहा है। यह स्तर 31 अगस्त, 2026 के बाद से सबसे निचले स्तर हैं।\n\nहालांकि, शांति की राह इतनी आसान नहीं है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच अभी भी कई मुद्दों पर गहरा मतभेद है। इसके अलावा, नई अमेरिकी कांग्रेस जनवरी तक कार्यभार नहीं संभालेगी, जिससे फॉरेन पॉलिसी में तुरंत बदलाव की संभावना कम है।\n\nनिवेशकों के लिए असली चिंता ग्लोबल सप्लाई की है। प्रमुख देशों में कमर्शियल ऑयल इन्वेंट्री 15 साल के निचले स्तर के करीब है। इसका मतलब है कि अगर सप्लाई चेन में कोई भी रुकावट आती है, तो मार्केट में बफर के लिए बहुत कम तेल उपलब्ध है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही अक्टूबर में सरप्लस दिखा हो, लेकिन सप्लाई में अस्थिरता के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा अभी भी बना हुआ है।
