वेस्ट एशिया में जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। Brent और MCX क्रूड के भाव कम होने से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी भी बना हुआ है।
वेस्ट एशिया में तनाव कम करने की कोशिशों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। तेहरान में सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद सप्लाई में बाधा आने का डर कुछ कम हुआ है, जिसका सीधा असर ग्लोबल बेंचमार्क पर पड़ा है। Brent Crude फ्यूचर्स लगभग 1% गिरकर $114.66 पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि WTI क्रूड के भाव भी घटकर $100.75 के स्तर पर आ गए हैं।
भारतीय बाजार पर असर
इस अंतरराष्ट्रीय हलचल का असर घरेलू मार्केट पर भी दिखा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर नवंबर के लिए क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 1.22% टूटकर ₹9,604 पर आ गए हैं, वहीं दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट्स 1.12% की गिरावट के साथ ₹9,460 पर ट्रेड कर रहे हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स की चेतावनी
भले ही आज की गिरावट राहत भरी हो, लेकिन इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फातिह बिरोल ने मार्केट की अस्थिरता को लेकर आगाह किया है। उनका मानना है कि एनर्जी मार्केट में स्ट्रक्चरल बदलाव के कारण स्थिति का 2027 तक सामान्य होना मुश्किल है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर रुपये और महंगाई पर असर डालते हैं। कच्चे तेल के दाम कम होने से एविएशन, पेंट, टायर और ल्यूब्रिकेंट बनाने वाली कंपनियों के रॉ मटेरियल की लागत घटती है, जो इनके मार्जिन के लिए पॉजिटिव है। हालांकि, मौजूदा जियोपॉलिटिकल स्थिति के कारण निवेशकों को अभी सतर्क रहने की सलाह है, क्योंकि सप्लाई चेन में किसी भी तरह का नया संकट कीमतों में फिर से आग लगा सकता है।
