सऊदी अरब की एनर्जी फैसिलिटी पर हुए हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें **$115** के पार पहुंच गई हैं। यह तेजी भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे रुपया, महंगाई और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।
शुक्रवार को सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में हलचल मच गई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स उछलकर $115.74 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत $102.72 दर्ज की गई। रास तनूरा, राबिघ और अबकैक जैसे प्रमुख रिफाइनरी केंद्रों पर हुए इन हमलों ने सप्लाई चेन के टूटने का डर पैदा कर दिया है, जिससे जुलाई के बाद से यह महीना क्रूड के लिए सबसे तेजी वाला साबित हो रहा है।\n\nभारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए मिडिल ईस्ट में बढ़ती यह भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव सीधा भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ता है, जो भारतीय रुपये की वैल्यू को कमजोर कर सकता है। इसके चलते ट्रांसपोर्ट और ईंधन आधारित सामानों की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा।\n\nशेयर बाजार में इसका असर खास तौर पर उन कंपनियों पर दिखेगा जो कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स पर निर्भर हैं। पेंट, टायर और पेट्रोकेमिकल कंपनियां अगर अपनी लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर भारी असर पड़ सकता है। निवेशक अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की गतिविधियों पर भी बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।\n\nयह स्थिति दर्शाती है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे समुद्री रास्तों को लेकर कितनी संवेदनशील है। फिलहाल निवेशकों को न केवल क्षेत्र में जारी तनाव पर, बल्कि घरेलू महंगाई के आंकड़ों और तेल की कीमतों पर भी नजर रखनी होगी।
