Crude Oil: क्या $96 के करीब थमेगी कच्चे तेल की रफ्तार? जियो-पॉलिटिकल रिस्क और सप्लाई का गणित

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AuthorAditya Rao|Published at:
Crude Oil: क्या $96 के करीब थमेगी कच्चे तेल की रफ्तार? जियो-पॉलिटिकल रिस्क और सप्लाई का गणित

ग्लोबल मार्केट में Crude Oil $96 के आसपास ट्रेड कर रहा है। मिडिल ईस्ट से सप्लाई बढ़ने के बावजूद जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कीमतें ऊपर बनी हुई हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई, रुपये की चाल और OMCs समेत कई सेक्टर्स के मुनाफे पर पड़ेगा।

क्रूड ऑयल मार्केट अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। वैश्विक स्तर पर Brent Crude $96 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अच्छी खबर यह है कि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अब अपनी कुल क्षमता के लगभग 50% तक बहाल हो चुकी है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल का प्रवाह ऐतिहासिक स्तरों के करीब 80% तक रिकवर हो गया है, जो आमतौर पर कीमतों को नीचे लाने का काम करता है।

जियो-पॉलिटिकल रिस्क का दबाव

सप्लाई में सुधार के बावजूद, वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे राजनयिक गतिरोध ने मार्केट में एक 'रिस्क प्रीमियम' पैदा कर दिया है। निवेशक इस स्थिति को बाइनरी इवेंट मान रहे हैं: यदि कोई बड़ी राजनयिक सफलता मिलती है, तो कीमतें $90 तक गिर सकती हैं, लेकिन अगर इंफ्रास्ट्रक्चर पर तनाव बढ़ता है, तो दाम फिर से $100 के पार जा सकते हैं।

भारतीय बाजार पर असर

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सरकारी खजाने पर दबाव डालती हैं और महंगाई को हवा देती हैं। इसका सीधा असर इन कंपनियों पर पड़ता है:

  • OMCs (IOC, BPCL, HPCL): तेल की बढ़ती लागत और रिटेल दाम के बीच का अंतर इनके मार्जिन पर भारी पड़ता है।
  • पेंट और टायर कंपनियां (Asian Paints, Berger Paints, MRF, Apollo Tyres): कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोकेमिकल आधारित इनपुट महंगे हो जाते हैं।
  • एविएशन सेक्टर (InterGlobe Aviation): ATF की कीमतें सीधे क्रूड से जुड़ी होती हैं, जिससे एयरलाइंस का मुनाफा प्रभावित होता है।

MCX पर नजर

घरेलू स्तर पर Multi Commodity Exchange (MCX) में क्रूड ऑयल का कॉन्ट्रैक्ट ₹9,280 से ₹9,300 के स्तर पर रेजिस्टेंस फेस कर रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो सपोर्ट लेवल्स ₹8,580, ₹8,270 और ₹7,850 पर देखे जा सकते हैं। निवेशकों को अब ईरान-यूएस परमाणु वार्ता और डीजल-क्रूड के बीच के स्प्रेड पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि डीजल की वैश्विक कमी कीमतों को नीचे आने से रोक रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.