ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑइल की कीमतें उथल-पुथल के दौर से गुजर रही हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका में आए भयानक तूफान के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड **$104** प्रति बैरल के पास पहुंच गया है।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर इस समय दोहरी मार पड़ रही है। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका के मैक्सिको की खाड़ी में आए शक्तिशाली तूफान 'Hurricane Isaias' ने तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $104 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल टैंकरों को मिल रही धमकियों के कारण शिपिंग बेहद महंगी और जोखिम भरी हो गई है, जिससे कीमतों में भारी प्रीमियम बना हुआ है।
उत्पादन में भारी कटौती
सप्लाई संकट इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि अमेरिका में तूफान के चलते मैक्सिको की खाड़ी में 70% से ज्यादा क्रूड ऑइल का उत्पादन अस्थायी रूप से ठप कर दिया गया है। उत्पादन में इस अचानक आई गिरावट और शिपिंग बॉटलनेक्स ने मार्केट को काफी टाइट कर दिया है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्रूड की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर भारतीय रुपये पर दबाव बनाती हैं और घरेलू महंगाई (Inflation) की चिंताएं बढ़ाती हैं। अगर ऑइल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ी हुई कच्चे माल की लागत को ग्राहकों तक पूरी तरह पास-ऑन नहीं कर पाती हैं, तो उनके मुनाफे यानी मार्जिन पर सीधा असर पड़ना तय है।
फिलहाल, मार्केट की नजरें कीमतों को स्थिर करने के प्रयासों पर हैं। G7 देशों ने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व रिलीज करने की योजना का ऐलान किया है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चल रही बातचीत पर निवेशकों की पैनी नजर है। आगे चलकर ग्लोबल इन्वेंटरी डेटा और कूटनीतिक वार्ताओं के अपडेट्स ही तय करेंगे कि तेल की चाल कैसी रहेगी।
