हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से ग्लोबल मार्केट में खलबली मच गई है। कच्चे तेल के दाम **$95.52** प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और एविएशन, पेंट व केमिकल जैसे सेक्टर्स पर पड़ने की आशंका है।
सप्लाय चैन पर मंडराया संकट
बुधवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में जबरदस्त तेजी देखी गई और कीमतें $95.52 के स्तर को छू गईं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम एनर्जी ट्रांजिट रूट है, जहां से दुनिया की कुल खपत का लगभग 20% तेल गुजरता है। सैन्य तनाव की वजह से सप्लाय रुकने के डर ने एनर्जी मार्केट में पैनिक बढ़ा दिया है।
इन्वेंट्री में गिरावट का दबाव
भू-राजनीतिक तनाव के साथ-साथ डेटा भी कीमतों को सपोर्ट कर रहा है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री में 2.6 मिलियन बैरल की गिरावट आई है। इन्वेंट्री घटने और सैन्य अस्थिरता ने तेल में एक बड़ा 'रिस्क प्रीमियम' जोड़ दिया है।
भारतीय निवेशकों के लिए चेतावनी
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय कंपनियों के लिए 'हेडविंड' साबित हो रही हैं। इससे सीधे तौर पर दो तरह के असर पड़ सकते हैं:
- मार्जिन पर दबाव: पेंट, टायर और केमिकल कंपनियां कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स का उपयोग करती हैं। लागत बढ़ने से इनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा।
- एविएशन सेक्टर: जेट फ्यूल की कीमतें सीधे क्रूड से जुड़ी हैं, जिससे एयरलाइन कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
ग्लोबल मार्केट पर ग्लोबल असर
तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई (Inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल मार्केट में 'रिस्क-ऑफ' माहौल है, जिसका असर अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड पर दिख रहा है, जो 4.81% तक पहुंच गई है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर स्टॉक मार्केट के लिए नेगेटिव होती हैं, विशेषकर भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में, जहां विदेशी निवेशकों का फ्लो प्रभावित हो सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि यह तनाव कब तक खिंचता है और इसका असर इन्फ्लेशन ट्रेंड्स पर क्या पड़ता है।
