मिडल ईस्ट और रूस में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते Brent crude ऑयल **$109.86** प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। सप्लाई चेन में आ रही इस बाधा का सीधा असर भारतीय बाजार और महंगाई पर पड़ने की आशंका है।
शुक्रवार को ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। खाड़ी देशों में अस्थिरता और रूस में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के कारण Brent crude की कीमतें 3.7% बढ़कर $109.86 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं, कच्चे तेल की ये बढ़ती कीमतें घरेलू महंगाई और ट्रेड बैलेंस के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।\n\nअमेरिकी मार्केट में WTI और Brent crude के बीच का अंतर घटकर $8 प्रति बैरल रह गया है, जो सर्दियों से पहले घटते स्टॉक को दर्शाता है। इसका सीधा असर एविएशन, पेंट्स और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों पर पड़ेगा, जहां इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।\n\nवहीं, सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी है और यह $4,165 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है। अमेरिका में लगातार आ रहे महंगाई के आंकड़ों के बाद मार्केट अब यह मानकर चल रहा है कि दिसंबर में Federal Reserve ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।\n\nइधर, इंडस्ट्रियल मेटल्स जैसे कॉपर और जिंक भी दबाव में हैं। कॉपर $14,300 प्रति टन पर टिका हुआ है, जिसे El Teniente माइन में सप्लाई में आ रही रुकावटों का सहारा मिल रहा है, जबकि जिंक की कीमतों में 3% की गिरावट दर्ज की गई है। अब इन मेटल्स की चाल चीन के GDP और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डेटा पर टिकी है, क्योंकि चीन की आर्थिक रिकवरी ही ग्लोबल डिमांड को मजबूती दे सकती है।
