US-Iran के बीच जारी तनातनी से कच्चे तेल की कीमतों में जुलाई के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी आई है। वहीं, गोल्ड के निवेशक अमेरिका के अहम 'पेरोल डेटा' का इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के अगले कदम का संकेत मिलेगा।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में इस हफ्ते जबरदस्त हलचल है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर एनर्जी सेक्टर पर पड़ा है। क्रूड ऑयल बेंचमार्क, खासकर Brent और West Texas Intermediate (WTI), शुक्रवार को कई हफ्तों के ऊपरी स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। ट्रेडर्स को डर है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई चेन को बाधित कर सकता है।
क्रूड ऑयल: सप्लाई का संकट
फिलहाल Brent क्रूड $95.67 प्रति बैरल के आसपास है, जबकि WTI $91.56 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। जुलाई के बाद से यह सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें $95 से $100 के दायरे में बनी रहीं, तो इससे महंगाई फिर से भड़क सकती है। यह स्थिति दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के लिए चुनौती बन सकती है, जिन्हें अपनी मॉनेटरी पॉलिसी पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
गोल्ड: डेटा का इंतजार
उधर, गोल्ड के दाम $4,477 प्रति औंस पर स्थिर हैं, जो इस हफ्ते आई 2% की तेजी के बाद कंसोलिडेशन दिखा रहे हैं। फिलहाल बाजार की पूरी नजर अमेरिका के अगस्त नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर टिकी है। यह आंकड़ा तय करेगा कि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के हालिया संकेतों के बाद माना जा रहा है कि अगर महंगाई काबू में रही, तो बैंक ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल क्रूड की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़े ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।
