आज कच्चे तेल के फ्यूचर्स में लगभग **1.5%** की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के इस अनुमान के बाद आई है कि 2026 में तेल की मांग **16 लाख बैरल प्रति दिन** कम हो सकती है। इसके अलावा, अमेरिका में कच्चे तेल के स्टॉक में **1.74 करोड़ बैरल** की अप्रत्याशित वृद्धि ने भी कीमतों को और नीचे धकेल दिया। निवेशक अब कमजोर पड़ती मांग और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच के असर का आकलन कर रहे हैं।
मांग में नरमी और सप्लाई का दबाव
गुरुवार को कच्चे तेल के फ्यूचर्स में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.5% और WTI क्रूड 1.2% तक नीचे आ गए। यह गिरावट प्रमुख ऊर्जा एजेंसियों द्वारा 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग के कमजोर पूर्वानुमान के बाद आई है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने सबसे निराशावादी रिपोर्ट जारी की, जिसमें अगले साल यानी 2026 में वैश्विक तेल मांग में 16 लाख बैरल प्रति दिन की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। एजेंसी का मानना है कि लगातार ऊंचे ईंधन की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव इस गिरावट के मुख्य कारण हो सकते हैं। वहीं, OPEC ने भी अपनी अगस्त की रिपोर्ट में 2026 के लिए ग्रोथ का अनुमान घटाकर केवल 5.8 लाख बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान जताया था।
अमेरिका में इन्वेंट्री में भारी उछाल
मांग में नरमी के संकेतों के अलावा, अप्रत्याशित सप्लाई डेटा ने कीमतों पर और दबाव डाला। 7 अगस्त, 2026 को समाप्त सप्ताह के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्यिक कच्चे तेल के भंडार में 1.74 करोड़ बैरल की बढ़ोतरी हुई। यह जनवरी 2023 के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है, जो दर्शाता है कि व्यापारियों की अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से ईंधन की आपूर्ति बढ़ रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार का संतुलन
कीमतों में गिरावट के बावजूद, ऊर्जा क्षेत्र भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने की बात दोहराई। आमतौर पर, ऐसी सैन्य संबंधी खबरें आपूर्ति बाधित होने के डर से कीमतों में उछाल लाती हैं, लेकिन वर्तमान में बाजार कमजोर मांग और बढ़ते स्टॉक के वास्तविक परिदृश्य के मुकाबले इस जोखिम को संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
आगे क्या?
बाजार सहभागियों के लिए, वर्तमान स्थिति 'डिमांड डिस्ट्रक्शन' के जोखिम को उजागर करती है, जहां लगातार उच्च ईंधन की कीमतें उपभोक्ता खर्च को कम करना शुरू कर देती हैं और आर्थिक विकास को धीमा कर देती हैं। ऊर्जा बाजार अब इन दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है: मध्य पूर्व में आपूर्ति झटके की संभावना और वैश्विक ऊर्जा भूख में कमी।
आगे चलकर, ऊर्जा क्षेत्र के लिए मुख्य निगरानी बिंदु साप्ताहिक अमेरिकी इन्वेंट्री डेटा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर राजनयिक और सैन्य स्थिति से संबंधित आधिकारिक अपडेट होंगे। यदि इन्वेंट्री का स्तर बढ़ता रहता है, तो यह संकेत दे सकता है कि बाजार में अधिक आपूर्ति है, जो भू-राजनीतिक जोखिमों के बने रहने पर भी तेल की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
