ईरान और अमेरिका के बीच बेहतर होते कूटनीतिक संबंधों के संकेतों और अमेरिका में इन्वेंट्री बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट पर पड़ता है।
गुरुवार को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह तेहरान और अमेरिका के बीच फिर से शुरू हुई कूटनीति है। इस डेवलपमेंट का असर ग्लोबल बेंचमार्क पर साफ दिखा। नवंबर Brent crude फ्यूचर्स 0.81% गिरकर $102.24 प्रति बैरल पर आ गए, जबकि West Texas Intermediate (WTI) फ्यूचर्स में 0.77% की गिरावट रही और यह $91.45 पर सेटल हुआ। भारतीय बाजार की बात करें तो Multi Commodity Exchange (MCX) पर अक्टूबर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 0.43% टूटकर ₹8,787 पर ट्रेड करते दिखे।
कूटनीति और जियोपॉलिटिकल हलचल
कीमतों में इस गिरावट की मुख्य वजह ईरान के अधिकारियों द्वारा कूटनीतिक चैनलों को प्राथमिकता देना है, ताकि जारी तनाव को कम किया जा सके। पूरी चर्चा का केंद्र ईरानी बंदरगाह और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई का मुख्य रूट है। हालांकि, UN जनरल असेंबली में ईरान के परमाणु टेक्नोलॉजी को लेकर दिए गए बयानों से साफ है कि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जिससे भविष्य में मार्केट में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी।
इन्वेंट्री का दबाव
कूटनीतिक संकेतों के अलावा, US Energy Information Administration के डेटा ने भी बाजार पर दबाव बनाया। अमेरिका में क्रूड ऑयल इन्वेंट्री 3 मिलियन बैरल बढ़कर 426.4 मिलियन के स्तर पर पहुंच गई है, जो 5 साल के औसत से 2% ज्यादा है। यह बंपर स्टॉक बताता है कि सप्लाई फिलहाल मजबूत है, जिससे सप्लाई शॉक का डर फिलहाल कम हो गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
भारतीय निवेशकों के लिए क्रूड की चाल बहुत मायने रखती है क्योंकि इसका सीधा असर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) और महंगाई पर पड़ता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के प्रॉफिट मार्जिन के लिए भी यह एक राहत वाली खबर है। हालांकि, एनर्जी मार्केट में मिले-जुले संकेत हैं—जहां एक तरफ क्रूड गिरा है, वहीं दूसरी तरफ MCX पर नेचुरल गैस फ्यूचर्स 1.62% चढ़कर ₹307.30 पर पहुंच गए।
