US-Iran के बीच बढ़ते तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी देखी गई है, जबकि गोल्ड के दाम चढ़ गए हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह ग्लोबल अनिश्चितता महंगाई और मार्केट स्टेबिलिटी के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय है।
कमोडिटी बाजार की नई चाल
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में सेंटीमेंट बदल रहे हैं। Brent crude के दाम गिरकर $95.20 प्रति बैरल के करीब आ गए हैं, जबकि WTI crude फिसलकर $90.77 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह गिरावट US और Iran के बीच चल रहे सैन्य तनाव के बीच आई है, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
उधर, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी के कारण गोल्ड की कीमतों में तेजी आई है। डॉलर कमजोर होने से दूसरे करेंसी वाले खरीदारों के लिए गोल्ड सस्ता हो जाता है, जिससे इसमें निवेश बढ़ा है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक माहौल बेहद संवेदनशील है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश क्रूड ऑयल आयात करता है। जब ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर देश की महंगाई और रुपए की वैल्यू पर पड़ता है।
- RBI का रुख: हाई इन्फ्लेशन के कारण RBI को इंटरेस्ट रेट्स पर सतर्क रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
- कॉर्पोरेट मार्जिन: हाई ऑयल प्राइसेज का असर मैन्युफैक्चरिंग से लेकर ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर तक पड़ता है, जो अंततः कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को कम कर देता है।
US फेड और मार्केट का डर
बाजार की नजर अब US फेडरल रिजर्व की बैठक पर है, जहां सितंबर 2026 में रेट हाइक की संभावना 68% तक आंकी गई है। साथ ही, US ट्रेजरी यील्ड का 4.8% तक पहुंचना भी उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए चुनौतीपूर्ण है। जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो ग्लोबल पैसा डॉलर की ओर भागता है, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स जैसे भारतीय बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल, मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा और अमेरिकी मौद्रिक नीति का अनिश्चित रास्ता निवेशकों के बीच सावधानी बरतने का माहौल बना रहा है। किसी भी बड़ी हलचल की स्थिति में मौजूदा ट्रेंड तेजी से पलट सकते हैं।
