हफ्ते भर की शानदार रैली के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में सोमवार को नरमी देखी गई। WTI क्रूड **$101.67** और ब्रेंट क्रूड **$115.16** प्रति बैरल पर आ गया है। हालांकि सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती हमलों का खतरा अभी भी बना हुआ है, जो सप्लाई चेन के लिए चिंता का विषय है।
सोमवार को बाजार में ट्रेडर्स ने प्रॉफिट-बुकिंग को तरजीह दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स 1.55% गिरकर $101.67 और ब्रेंट क्रूड 1.34% टूटकर $115.16 प्रति बैरल पर सेटल हुआ। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले हफ्ते मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड में 6% का उछाल दर्ज किया गया था।
उतार-चढ़ाव की वजह क्या है?
कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली के कारण है। हालांकि, सऊदी अरब में हूती मिलिटेंट्स द्वारा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। भले ही सऊदी सरकार ने ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने का दावा किया है, लेकिन इस अस्थिरता की वजह से ग्लोबल मार्केट में एक 'रिस्क प्रीमियम' बना हुआ है। किसी भी बड़ी सप्लाई बाधा की स्थिति में कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर देश का इंपोर्ट बिल बढ़ाती हैं और रुपये पर दबाव डालती हैं। इससे महंगाई बढ़ती है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पैनी नजर रहती है।
शेयर बाजार पर इसका असर सेक्टर-दर-सेक्टर अलग है:
- अपस्ट्रीम कंपनियां: ONGC और Oil India जैसी कंपनियों को ऊंचे दाम से फायदा होता है, क्योंकि उनके प्रॉफिट मार्जिन सुधरते हैं।
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs): BPCL, HPCL और Indian Oil Corporation पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है, अगर वे लागत का बोझ ग्राहकों पर न डाल पाएं।
- अन्य सेक्टर: पेंट और एविएशन जैसी इंडस्ट्रीज पर कच्चा तेल महंगा होने का नकारात्मक असर पड़ता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, सऊदी अरब के आधिकारिक बयान और OPEC+ के उत्पादन स्तर पर फैसलों से कीमतों की दिशा तय होगी।
