मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $75 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। ऊर्जा की लागत में इस उछाल ने निवेशकों की भावनाओं को प्रभावित किया है, वहीं गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का संकेत दे रहे हैं। निवेशक तेल-संवेदनशील क्षेत्रों और रुपये पर पड़ने वाले वैश्विक दबाव पर नजर रखेंगे।
मध्य पूर्व में तनाव और तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। ताजा संघर्ष की खबरों के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव $75 प्रति बैरल के पार चला गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, और भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूते नहीं रहेंगे।
भारतीय बाजार पर असर
बुधवार, 8 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रहने की उम्मीद है। गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स, जो अक्सर भारतीय एक्सचेंजों पर शुरुआती रुझान का संकेत देते हैं, लगभग 140 अंकों की गिरावट का इशारा कर रहे हैं। तेल की बढ़ती कीमतों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है। ऊंची ऊर्जा लागत से आयात बिल बढ़ सकता है, जो भारतीय रुपये पर दबाव डाल सकता है और एविएशन, पेंट और केमिकल्स जैसे तेल-आधारित क्षेत्रों की कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक बाजार का हाल
मंगलवार को वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी देखी गई। निवेशकों का रुझान हाई-ग्रोथ वाले टेक्नोलॉजी स्टॉक्स से हटता दिखा, और ऊर्जा की बढ़ती लागतों पर भी प्रतिक्रिया हुई। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.25% गिरा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 1.16% लुढ़क गया।
कमोडिटीज में मिले-जुले संकेत
जहां तेल की कीमतों में लगभग 2% की तेज बढ़ोतरी हुई, वहीं कीमती धातुओं में मिले-जुले रुझान देखे गए। COMEX एक्सचेंज पर सोना 0.85% बढ़ा, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय में एक सुरक्षित निवेश के तौर पर अपनी भूमिका दर्शाता है। वहीं, चांदी की कीमतों में 1.38% की गिरावट आई। भारत में भी घरेलू चांदी की कीमतों में 2.3% की कमी आई, जो अब ₹2.30 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई है। यह दिखाता है कि निवेशक सुरक्षा की तलाश में हैं, लेकिन औद्योगिक धातुओं की मांग में अस्थिरता पर भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
संस्थागत निवेशकों की गतिविधि
बाजार सहभागियों की नजर संस्थागत निवेशकों की ट्रेडिंग पर भी है। 7 जुलाई 2026 को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार में ₹393.19 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹383.43 करोड़ के शेयर बेचकर शुद्ध बिकवाली की। घरेलू फंडों द्वारा की गई यह बिकवाली, वैश्विक संकेतों के साथ मिलकर, समेकन (consolidation) की अवधि का संकेत देती है। पिछले सत्र में, बेवरेजेज – अल्कोहलिक सेक्टर 3.22% के उछाल के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जबकि बेवरेजेज – नॉन-अल्कोहलिक सेक्टर 3.78% की तेज गिरावट के साथ प्रभावित हुआ।
आगे क्या?
निवेशक अब भारतीय रुपये की स्थिरता पर नजर रखेंगे, जो 6 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.39 पर बंद हुआ था। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि ऊर्जा की कीमतों में यह मौजूदा उछाल बना रहता है या स्थिर होता है। मध्य पूर्व में तनाव का कोई भी और बढ़ना एक प्रमुख निगरानी योग्य कारक बना रहेगा, जो आने वाले दिनों में बाजार की अस्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
