US-Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण Crude Oil की कीमतें उछलकर **$115** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। वहीं दूसरी ओर, US Fed द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना के चलते Gold की कीमतें **$4,000** के आसपास स्थिर बनी हुई हैं।
कच्चे तेल में उबाल
30 अक्टूबर को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। Brent Crude $115 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, जबकि West Texas Intermediate (WTI) करीब $103 पर ट्रेड कर रहा है। मिडिल ईस्ट में संभावित टकराव की आशंका से एनर्जी सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिसका असर सीधा कीमतों पर दिख रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से हमारा इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जो भारतीय रुपये (INR) पर दबाव डालेगा। इसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एविएशन जैसे सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
सोने की चाल और अमेरिकी बाजार
हालांकि क्रूड में तेजी है, लेकिन Gold की कीमतें $4,000 प्रति औंस के आसपास स्थिर हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कंजम्पशन एक्सपेंडिचर इंडेक्स 0.5% बढ़ा है, जो मार्च के बाद सबसे बड़ी बढ़त है।
चूंकि सोना कोई ब्याज (interest) नहीं देता, इसलिए ऊंची दरों के माहौल में इसकी चमक फीकी पड़ रही है। यही कारण है कि Gold में लगातार दूसरे महीने गिरावट का दौर जारी है। साथ ही, कमोडिटी मार्केट में सिल्वर 0.4% गिरकर $51.94 पर आ गया है, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में भी नरमी है।
अब निवेशकों की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हैं। भारतीय बाजार के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या RBI इस ग्लोबल महंगाई के चलते देश में ब्याज दरों या लिक्विडिटी पर कोई नया रुख अपनाता है।
