Hindustan Copper Share Price: ₹12,900 पार कॉपर! लेकिन क्या शेयर हो जाएगा महंगा?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Hindustan Copper Share Price: ₹12,900 पार कॉपर! लेकिन क्या शेयर हो जाएगा महंगा?
Overview

ग्लोबल कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) जैसी भारतीय कंपनियों को फायदा हो रहा है। हालांकि, शेयर की ऊंची वैल्यूएशन (Valuation) और हालिया प्रोडक्शन में आई गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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ग्लोबल कॉपर प्राइस रैली ने बढ़ाई हलचल

दुनिया भर में नॉन-फेरस मेटल (Non-ferrous metal) की कीमतें जबरदस्त तेजी दिखा रही हैं। कॉपर तो ऐतिहासिक ₹12,902 प्रति टन (LME prices) के स्तर को पार कर गया है, जो 2025 के अंत में $10,600 था। इस बड़े उछाल के पीछे क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, AI डेटा सेंटर्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण सेक्टर्स से लगातार बढ़ती मांग है।

भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता और हिंदुस्तान कॉपर की भूमिका

भारत में इस कॉपर बूम का सीधा फायदा उठाने के लिए बहुत कम विकल्प मौजूद हैं। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL), जो सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी है, भारत की कुछ चुनिंदा कंपनियों में से एक है जो सीधे तौर पर कॉपर माइनिंग और प्रोडक्शन में लगी हुई है। हकीकत यह है कि भारत के पास दुनिया का महज 0.2% कॉपर रिजर्व है, जिसके चलते देश अपनी लगभग 98% कॉपर की जरूरतें इंपोर्ट (Import) करके पूरा करता है। HCL के पास भारत के कुल कॉपर ओर रिजर्व का करीब 40% हिस्सा है।

प्रोडक्शन में आई रुकावटें और रेवेन्यू में ग्रोथ

अपने विशाल रिजर्व के बावजूद, हिंदुस्तान कॉपर को फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में मेटल इन कॉन्सेंट्रेट (MIC) के प्रोडक्शन में गिरावट का सामना करना पड़ा। इसकी मुख्य वजह Kolihan माइन में वाइंडिंग सिस्टम (winding system) में आई एक बड़ी खराबी थी, जिसके कारण प्रोडक्शन को रोकना पड़ा। नतीजतन, MIC की बिक्री भी FY25 में घट गई। हालांकि, कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) में साल-दर-साल (YoY) 20.6% का इजाफा हुआ और यह ₹2,071 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 58.3% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो ₹467.4 करोड़ रहा। यह ग्रोथ मुख्य रूप से कॉपर की ऊंची कीमतों की वजह से संभव हुई। फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में यह ट्रेंड और मजबूत हुआ, जहां रेवेन्यू 110% बढ़कर ₹687.3 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट 151.6% की बड़ी छलांग लगाकर ₹156.3 करोड़ पर पहुंच गया। इस तिमाही के दौरान औसत कॉपर की कीमत $9,180 प्रति टन थी।

विस्तार की आक्रामक योजनाएं

हिंदुस्तान कॉपर बढ़ती मांग को भुनाने के लिए अपनी माइनिंग क्षमता को बढ़ाने पर जोर-शोर से काम कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य 2030-31 तक अपनी माइनिंग कैपेसिटी को मौजूदा लगभग 40 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 1.2 करोड़ टन प्रति वर्ष तक ले जाना है। इस बड़े लक्ष्य को पाने के लिए मौजूदा खदानों का विस्तार, बंद पड़ी खदानों को फिर से चालू करना और नई खदानें विकसित करने जैसी योजनाएं शामिल हैं।

वैल्यूएशन पर बड़ा सवाल

अपनी मजबूत स्थिति और विस्तार योजनाओं के बावजूद, हिंदुस्तान कॉपर की वैल्यूएशन (Valuation) पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। स्टॉक फिलहाल 81.9 के कंसोलिडेटेड P/E (Price-to-Earnings) रेशियो और 18.1 के प्राइस-टू-बुक वैल्यू (P/B) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। इसकी तुलना में, प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज कंपनी Hindalco Industries Ltd. 12.5 के P/E और 1.6 के P/B मल्टीपल पर कारोबार कर रही है। कमोडिटी की कीमतें अपने स्वभाव से बहुत ज्यादा वोलेटाइल (volatile) होती हैं, और भविष्य में इनकी चाल का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में, हिंदुस्तान कॉपर का मौजूदा वैल्यूएशन काफी महंगा माना जा रहा है, जो काफी हद तक कॉपर की कीमतों के लगातार ऊंचे बने रहने पर निर्भर है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.