Copper के भाव 14 अक्टूबर, 2026 को **$14,630** प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। माइनिंग सप्लाई में आ रही दिक्कतों और अमेरिका में बढ़ती स्टॉकपिलिंग के चलते मार्केट में हलचल तेज है।
माइनिंग और लॉजिस्टिक्स की मार
Copper की कीमतों में आई यह रिकॉर्ड तेजी कोई मामूली हलचल नहीं है। सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित है। Antofagasta की Centinela माइन में लेबर स्ट्राइक और Codelco की El Teniente माइन में भूस्खलन के चलते काम रुकने से प्रोडक्शन पर बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड की भारी किल्लत ने माइनिंग कंपनियों की कमर तोड़ दी है, क्योंकि तांबा निकालने की 'लीचिंग' प्रोसेस के लिए इनकी सख्त जरूरत होती है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण शिपिंग रूट्स भी प्रभावित हुए हैं, जिससे जरूरी केमिकल्स समय पर नहीं पहुंच पा रहे।
टैरिफ का डर और मार्केट में अफरा-तफरी
ट्रेड पॉलिसी को लेकर बना डर इस तेजी का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। संभावित 15% से 30% तक के इंपोर्ट टैरिफ से बचने के लिए ट्रेडर्स बड़ी तेजी से मेटल को अमेरिकी वेयरहाउस में शिफ्ट कर रहे हैं। नतीजा यह है कि दुनिया भर का 70% से 71% स्टॉक अब सिर्फ अमेरिका में जमा है। बाकी दुनिया में सप्लाई की कमी हो गई है, जिससे इंटरनेशनल एक्सचेंजों पर कीमतें आसमान छू रही हैं।
AI और ग्रीन एनर्जी से मिल रहा सहारा
भले ही बाजार में रोज उतार-चढ़ाव हो, लेकिन लंबी अवधि के लिए तांबे की डिमांड बहुत मजबूत है। AI डेटा सेंटर्स, पावर ग्रिड्स के मॉडर्नाइजेशन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में Copper की खपत रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है। यह डिमांड साइकल शॉर्ट-टर्म इकोनॉमिक हलचल से अलग है, जो कीमतों के लिए एक मजबूत 'फ्लोर' का काम कर रही है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मौजूदा माहौल में जोखिम काफी अधिक है। अगर अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी साफ होती है या टैरिफ का खतरा टलता है, तो कीमतों में तेज करेक्शन देखने को मिल सकता है। माइनिंग विवादों के निपटारे और केमिकल सप्लाई चेन पर नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है। फिलहाल, बाजार हाई वोलेटिलिटी के दौर से गुजर रहा है।
