Copper Prices: मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच उतार-चढ़ाव, ₹13,800 के करीब भाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
Copper Prices: मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच उतार-चढ़ाव, ₹13,800 के करीब भाव

मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई में कमी के चलते कॉपर (तांबा) की कीमतें लंदन मेटल एक्सचेंज पर **₹13,800** प्रति टन के करीब कारोबार कर रही हैं। जहां चीन की मजबूत इम्पोर्ट डिमांड और सीमित इन्वेंट्री कीमतों को सहारा दे रही है, वहीं वैश्विक आर्थिक विकास और अमेरिकी टैरिफ की चिंताएं आगे की बढ़त को सीमित कर सकती हैं।

Detailed Coverage

सप्लाई की कमी और बाजार की तंगी

कॉपर की मौजूदा कीमतों को बाजार में फिजिकल टाइटनेस का सहारा मिल रहा है। खदानों में आई रुकावटें और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों से सल्फ्यूरिक एसिड की संभावित कमी ने सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सल्फ्यूरिक एसिड, वैश्विक स्तर पर रिफाइंड कॉपर उत्पादन का लगभग 20% हिस्सा बनाने वाली सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन और इलेक्ट्रोविनिंग प्रक्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है। इसके अलावा, दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता चीन में इम्पोर्ट डिमांड में भारी उछाल देखा जा रहा है। चीन में परिष्कृत तांबे के आयात की लागत मापने वाला यांगशान प्रीमियम इस साल जनवरी में $20 प्रति टन से बढ़कर $100 प्रति टन हो गया है। यह बदलाव चीन में कड़े नियमों के कारण स्क्रैप धातु की कमी और घरेलू स्मेल्टरों में रखरखाव संबंधी आउटेज के कारण हुआ है।

आर्थिक और टैरिफ का दबाव

सप्लाई की तंगी कीमतों को सहारा दे रही है, वहीं ING Think और BMI जैसी संस्थाओं के विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में और उछाल सीमित रह सकता है। वैश्विक आर्थिक विकास और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही, संभावित अमेरिकी टैरिफ का खतरा बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारक है। BMI ने कहा है कि सप्लाई की दिक्कतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों की मांग बाजार का समर्थन कर रही है, लेकिन वर्तमान मूल्य स्तर भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को भी दर्शा सकते हैं, जो पश्चिम एशिया में होने वाले घटनाक्रमों के आधार पर तेजी से बदल सकते हैं।

कॉपर निवेशकों के लिए आगे का रास्ता

ऑस्ट्रेलिया के ऑफिस ऑफ द चीफ इकोनॉमिस्ट (Office of the Chief Economist) का अनुमान है कि सप्लाई की कमी के कारण 2026 के अंत तक कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। हालांकि, लंबे समय के लिए कीमतों में नरमी की उम्मीद है। अनुमान है कि जैसे-जैसे वैश्विक खदानों की सप्लाई बढ़ेगी और परिष्कृत उत्पादन मांग के अनुरूप होगा, कीमतें 2031 तक $11,050 प्रति टन के स्तर पर आ सकती हैं। निवेशकों के लिए, मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय सप्लाई चेन की स्थिरता, चीन के इम्पोर्ट डेटा और अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर किसी भी औपचारिक घोषणा पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये कारक कॉपर की अल्पकालिक मूल्य प्रवृत्ति को निर्धारित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.