Copper Prices: अमेरिका में महंगाई का असर! गिरते कॉपर के भाव से निवेशकों की चिंता बढ़ी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Copper Prices: अमेरिका में महंगाई का असर! गिरते कॉपर के भाव से निवेशकों की चिंता बढ़ी

US इन्फ्लेशन के आंकड़ों के बाद London Metal Exchange पर कॉपर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ा है।

ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका से आए महंगाई के ताजा आंकड़े उम्मीद से कहीं ज्यादा गरम रहे हैं, जिसके बाद निवेशकों का सेंटीमेंट बदल गया है। मार्केट को अब डर है कि Federal Reserve अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे डॉलर इंडेक्स में मजबूती आ रही है। चूंकि कॉपर का ट्रेड ग्लोबल लेवल पर डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर महंगा होने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए यह मेटल खरीदना महंगा हो गया है, जिससे डिमांड में कमी देखी जा रही है।

क्या सप्लाई का संकट कम हो रहा है?

कुछ समय पहले तक सप्लाई में भारी कमी के कारण कॉपर की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखा गया था। हालांकि, अब 'स्पॉट प्रीमियम' कम होने लगे हैं, जो यह संकेत देते हैं कि मेटल की जो शॉर्टेज पहले दिख रही थी, अब वह धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। अब बाजार का फोकस सप्लाई की कमी से हटकर मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर जैसे कि ब्याज दर और करेंसी की मजबूती पर शिफ्ट हो गया है।

भारतीय कंपनियों पर असर

इस गिरावट का सीधा असर भारतीय बाजार पर दो तरह से पड़ेगा:

  1. मेटल प्रोड्यूसर: जो भारतीय कंपनियां कॉपर या अन्य बेस मेटल का उत्पादन करती हैं, उनके लिए ग्लोबल कीमतों में यह गिरावट चिंता का विषय है। इससे उनकी रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि वे ग्लोबल बेंचमार्क पर काम करती हैं।

  2. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स और केबल बनाने वाली कंपनियां, जो कॉपर का कच्चे माल (Raw Material) के रूप में इस्तेमाल करती हैं, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। इनपुट कॉस्ट कम होने से इनका ऑपरेटिंग मार्जिन सुधर सकता है, बशर्ते तैयार माल की डिमांड बनी रहे।

आगे की रणनीति

निवेशकों को अब US की ट्रेड पॉलिसी, खास तौर पर रिफाइंड मेटल इंपोर्ट पर लगने वाले टैरिफ पर नजर रखनी होगी। इसके साथ ही, London Metal Exchange के वेयरहाउस में स्टॉक लेवल को मॉनिटर करना जरूरी है; अगर इन्वेंट्री बढ़ती है, तो कॉपर की कीमतों में और तेजी आने की संभावना कम हो जाएगी। फिलहाल, मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है जब तक कि Federal Reserve की अगली चाल साफ नहीं हो जाती।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.