ग्लोबल मार्केट में Copper की कीमतें बढ़कर **$14,391** प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिका में संभावित इम्पोर्ट टैरिफ के डर से निवेशक तांबे का स्टॉक करने में जुट गए हैं, जबकि BHP जैसी बड़ी माइनिंग कंपनियों में सप्लाई की समस्या ने अनिश्चितता बढ़ा दी है।
बाजार में तेजी की क्या है वजह?
लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतें $14,391 प्रति टन के स्तर को छू गई हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का अनुमान है कि साल 2026 तक यह $14,700 प्रति टन तक पहुंच सकता है। इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर में तांबे की बढ़ती मांग और भविष्य में सप्लाई की कमी की आशंका है।
स्टॉकिंग का असर
अमेरिका में निवेशक 'टैरिफ हेजिंग' के तहत बड़े पैमाने पर तांबे को स्टॉक कर रहे हैं ताकि भविष्य में लगने वाले संभावित ट्रेड बैरियर से बचा जा सके। कॉमेक्स (Comex) में तांबे की इन्वेंट्री 7,18,200 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। बढ़ती डिमांड को देखते हुए लंदन मेटल एक्सचेंज ने ओवेन्सबोरो, केंटकी में एक नया डिलीवरी पॉइंट भी मंजूरी दे दिया है।
माइनिंग सेक्टर की चुनौतियां
सप्लाई साइड पर दबाव बना हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनियों में से एक, BHP ने हाल ही में अपने कॉपर उत्पादन में 19% की भारी गिरावट दर्ज की है। चिली और ऑस्ट्रेलिया में ऑपरेशन्स में आई बाधाओं ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। एल्युमिनियम, जिंक और निकेल जैसे अन्य मेटल्स भी इसी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं, जिससे इंडस्ट्रियल मेटल सेक्टर में अस्थिरता बनी हुई है।
