Copper के दाम पिछले काफी समय से एक दायरे में सिमटे हुए हैं। फिलहाल यह कमोडिटी **₹1,360** से **₹1,432** के बीच कारोबार कर रही है। बाजार की नजर **₹1,340** के मजबूत सपोर्ट लेवल पर टिकी है।
भारतीय बाजारों में Copper के दाम पिछले तीन महीनों से एक ही दायरे में फंसे हुए हैं, जिससे इसमें किसी भी तरह की ठोस दिशा का अभाव दिख रहा है। अगस्त के बाद से ही यह कॉन्ट्रैक्ट मुख्य रूप से ₹1,360 से ₹1,432 के बीच झूल रहा है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
टेक्निकल लेवल्स और चुनौतियां
पिछले हफ्ते Copper की कीमत एक बार ₹1,360 के स्तर से नीचे गिरकर ₹1,335.60 के निचले स्तर तक पहुंची थी, लेकिन इसने तुरंत रिकवरी दिखाई। यह संकेत देता है कि निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हैं जो फिलहाल किसी भी बड़ी गिरावट को थामे हुए हैं।
तकनीकी चार्ट पर ₹1,340 से ₹1,360 का जोन एक मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम कर रहा है। वहीं, ऊपर की ओर ₹1,432 का रेजिस्टेंस लेवल एक बड़ी दीवार बना हुआ है। जब तक कॉपर इस स्तर को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक इसमें तेजी के रुझान की उम्मीद कम है।
ग्लोबल मार्केट का क्या है असर?
Copper को अक्सर ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी का बैरोमीटर माना जाता है। कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इसकी भारी मांग रहती है। फिलहाल बाजार का न्यूट्रल आउटलुक यह बताता है कि निवेशक ग्लोबल डिमांड और प्रमुख देशों की मॉनेटरी पॉलिसी से जुड़े संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि ₹1,432 का ब्रेकआउट मिलता है, तो भाव ₹1,480 तक जा सकते हैं। वहीं, ₹1,340 का सपोर्ट टूटने पर इसमें भारी बिकवाली आ सकती है और भाव ₹1,300 तक लुढ़क सकते हैं। अब किसी भी बड़े बदलाव के लिए ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा का इंतजार करना ही बेहतर होगा।
