MCX पर कॉपर फ्यूचर्स ₹1,365 प्रति किलो के स्तर के करीब कारोबार कर रहे हैं। यह स्तर एक तकनीकी सपोर्ट जोन माना जा रहा है, लेकिन बढ़ती ग्लोबल इन्वेंटरी और कमजोर मांग के कारण मेटल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि सपोर्ट बना रहता है या फंडामेंटल दबाव के कारण गिरावट आती है।
₹1,365 के सपोर्ट पर कॉपर, क्या टिक पाएगा?
MCX पर कॉपर फ्यूचर्स इस समय ₹1,365 प्रति किलो के महत्वपूर्ण स्तर के पास पहुंच गए हैं। बाजार के पार्टिसिपेंट्स इस लेवल पर कड़ी नजर रख रहे हैं क्योंकि यह कॉपर के 21-दिन मूविंग एवरेज के करीब है, जिसे कई ट्रेडर्स शॉर्ट-टर्म मजबूती का पैमाना मानते हैं।
ऐतिहासिक तौर पर, यह स्तर एक सपोर्ट की तरह काम करता आया है, जहां कीमतों में गिरावट रुक सकती है या पलट सकती है। लेकिन, मौजूदा बाजार का माहौल पिछले कुछ महीनों से अलग है। पहले जो सप्लाई की तंगी के कारण तेजी देखने को मिल रही थी, वह अब सप्लाई की बदलती गतिशीलता के कारण वास्तविकता से रूबरू हो रही है।
सप्लाई में नरमी और मांग की चुनौतियाँ
कॉपर की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव ग्लोबल इन्वेंटरी में हुए इजाफे का है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, स्टॉकपाइल में बड़ी दैनिक वृद्धि देखी गई है, जो अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इन्वेंटरी में यह वृद्धि दर्शाती है कि ग्लोबल सप्लाई की तंगी, जो पहले कीमतों को बढ़ाने में एक मजबूत कारक थी, अब कम हो रही है।
सप्लाई के अलावा, फिजिकल मांग भी एक चुनौती बनी हुई है। रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में घरेलू मांग फिलहाल कमजोर है, और वैश्विक बाजारों में भी खरीदारी की रुचि कम दिख रही है। बढ़ती सप्लाई और घटती मांग का यह मेल, पिछले प्राइस रन-अप के मुकाबले एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। इसके अतिरिक्त, बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी का असर कमोडिटी निवेश पर भी पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए अहम स्तर
इस कमोडिटी पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या ₹1,365 का सपोर्ट इन फंडामेंटल दबावों का सामना कर पाएगा। अगर मजबूत खरीदारी की कमी के कारण कीमत इस स्तर को बनाए रखने में संघर्ष करती है, तो यह मोमेंटम में बदलाव का संकेत दे सकता है, जिससे कीमतों में और गिरावट आ सकती है। वहीं, अगर बाजार को इस स्तर पर पर्याप्त खरीदार मिलते हैं, तो यह स्थिरता या वापसी का दौर ला सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशकों को इन्वेंटरी रिपोर्ट और फिजिकल डिमांड के रुझानों पर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा। बाजार बारीकी से देखेगा कि कॉपर ₹1,365 से ऊपर अपनी स्थिति बनाए रख पाता है या नहीं, या फिर फंडामेंटल दबाव उसे निचले सपोर्ट स्तरों की ओर ले जाता है।
