MCX पर Copper फ्यूचर्स एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और ₹1,432 के रेजिस्टेंस लेवल के पास कंसोलिडेट हो रहा है। निवेशक चिली की खदानों में सप्लाई की चिंताओं और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारतीय बाजार में कॉपर (Copper) फ्यूचर्स इस समय कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। 14 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट ₹1,432 के रेजिस्टेंस बैरियर के आसपास घूम रहा है। औद्योगिक मेटल पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, यह मौजूदा हलचल बाजार की अनिश्चितता को दर्शाती है, जहां सप्लाई का डर और मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव एक-दूसरे से टकरा रहे हैं।
सप्लाई बनाम ग्लोबल प्रेशर
धातु की कीमतों में उठा-पटक के पीछे दो बड़े ग्लोबल फैक्टर्स हैं। एक तरफ, चिली की प्रमुख खदानों, जैसे BHP की Escondida और Antofagasta की Centinela में संभावित हड़ताल ने सप्लाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आमतौर पर, सप्लाई रिस्क कीमतों को सपोर्ट देते हैं क्योंकि निवेशक उत्पादन में कमी की संभावना को पहले ही भांप लेते हैं।
दूसरी तरफ, अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) के डेटा का इंतजार बाजार पर भारी पड़ रहा है। यह आंकड़ा Federal Reserve के ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसलों के लिए निर्णायक होगा। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जो कॉपर जैसी औद्योगिक धातुओं के लिए निगेटिव माना जाता है क्योंकि इससे आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आती है।
टेक्निकल चार्ट और सपोर्ट लेवल्स
टेक्निकली देखें तो कॉपर कॉन्ट्रैक्ट को ₹1,432 के ऊपर बंद होने में संघर्ष करना पड़ रहा है। यदि यह लेवल पार नहीं हुआ, तो कीमतों में गिरावट (Correction) देखने को मिल सकती है। ऐसे में ट्रेडर्स के लिए ₹1,400 पहला सपोर्ट और ₹1,360 का लेवल एक मजबूत सहारा बना हुआ है। यदि कीमतें इससे नीचे गिरती हैं, तो पिछले कुछ महीनों का बुलिश ट्रेंड कमजोर हो सकता है।
बाजार में अमेरिकी ट्रेड टैरिफ की अनिश्चितता और गिरते ट्रेडिंग वॉल्यूम भी चिंता का विषय हैं। कम वॉल्यूम अक्सर बाजार में अचानक अस्थिरता और तेज गिरावट का संकेत होते हैं, इसलिए निवेशकों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है।
