Multi Commodity Exchange (MCX) पर 4 नवंबर, 2026 को कॉपर फ्यूचर्स **0.7%** गिरकर **₹1,355.85** प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे ग्लोबल लेवल पर टेक सेक्टर में खर्च कम होने की चिंता और अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता मुख्य कारण है।
4 नवंबर, 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर नवंबर डिलीवरी के लिए कॉपर फ्यूचर्स ₹9.55 की कमजोरी के साथ ₹1,355.85 प्रति किलोग्राम पर सेटल हुआ। यह गिरावट इंडस्ट्रियल मेटल्स में बढ़ रही अस्थिरता को दर्शाती है, जिसका सीधा संबंध ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च को लेकर पैदा हुई चिंताओं से है।\n\n### कॉपर की कीमतों पर ग्लोबल फैक्टर्स का असर\n\nकॉपर को ग्लोबल इकोनॉमी की सेहत का पैमाना माना जाता है। चूंकि डेटा सेंटर्स की वायरिंग और हार्डवेयर के लिए कॉपर अनिवार्य है, इसलिए टेक सेक्टर में निवेश धीमा होने का सीधा असर इसकी डिमांड पर पड़ता है। इसके अलावा, अमेरिका की नई ट्रेड पॉलिसी और इंपोर्टेड मेटल्स पर संभावित टैरिफ की चर्चा ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे इंडस्ट्रियल डिमांड के कमजोर होने का डर सता रहा है।\n\n### सप्लाई की कमी बनी सहारा\n\nडिमांड को लेकर भले ही चिंताएं हों, लेकिन सप्लाई साइड में आ रही दिक्कतों के कारण कीमतें एक लेवल से ज्यादा नहीं गिर पा रही हैं। Ivanhoe Mines ने हाल ही में कांगो (DRC) स्थित Kamoa-Kakula कॉपर माइन के लिए 2027 का प्रोडक्शन गाइडेंस घटा दिया है। चिली और कांगो जैसे प्रमुख खनन क्षेत्रों में लॉजिस्टिक चुनौतियों के चलते ग्लोबल सप्लाई में कमी देखी जा रही है, जो कीमतों को एक 'फ्लोर' (सपोर्ट) प्रदान कर रही है।\n\n### निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?\n\nकॉपर की चाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ का संकेत देती है। निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डेटा, अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी और ग्लोबल माइनिंग कंपनियों की प्रोडक्शन रिपोर्ट्स पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। इन्हीं डेटा पॉइंट्स से यह स्पष्ट होगा कि क्या कॉपर अपनी मौजूदा सपोर्ट लेवल को बचा पाएगा या इसमें और उठा-पटक देखने को मिलेगी।
