Coonoor में चाय की कीमतों में इस हफ्ते अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। बड़ी चाय कंपनियों की तरफ से CTC चाय की जबरदस्त मांग देखी गई है। नीलामी में **97%** से ज्यादा लीफ टी की बिक्री हुई है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि नीलगिरी में उम्मीद से कम बारिश का उत्पादन पर क्या असर पड़ता है और कीमतें कितनी बढ़ती हैं।
खरीदार की पहली पसंद:
Coonoor चाय नीलामी में इस हफ्ते बड़ी चाय कंपनियों (Blenders) की तरफ से CTC चाय की जबर्दस्त मांग देखी गई, जिससे कीमतों में उछाल आया है। ग्लोबल टी ऑक्शनियर्स के मुताबिक, सेल 31 में पेश किए गए 21.46 लाख किलोग्राम लीफ टी में से करीब 97% की बिक्री हुई। वहीं, डस्ट टी सेगमेंट में भी 5.89 लाख किलोग्राम में से 82% चाय बिक गई, जिससे बाजार में अच्छी हलचल रही।
क्वालिटी और कंप्लायंस पर जोर:
बाजार के जानकारों का मानना है कि बड़ी कंपनियां अब साउथ इंडियन चाय को प्राथमिकता दे रही हैं। इसकी मुख्य वजह है भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा तय किए गए कीटनाशक अवशेषों (Pesticide Residue) के सख्त नियम। इन नियमों का पालन करने वाली चाय की खरीद पर फोकस करके, कंपनियां क्वालिटी सुनिश्चित कर रही हैं, जिसने क्षेत्र में कीमतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। टी बोर्ड की निगरानी में यह रेगुलेटरी कंप्लायंस साउथ इंडियन चाय सेक्टर में कंपनियों के लिए एक अहम फैक्टर बना हुआ है।
बारिश की कमी और उत्पादन का अनुमान:
आगे चलकर, बाजार से जुड़े लोग नीलगिरी के मौसम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। इस सीजन में इस इलाके में अब तक सामान्य से 50% कम बारिश दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए, यह सप्लाई में कमी का संकेत है। अगर बारिश की यह कमी जारी रहती है, तो चाय का उत्पादन कम हो सकता है, जो ऐतिहासिक रूप से कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण बनता है। बेहतर क्वालिटी वाली CTC लीफ वैरायटी में जहां ₹2-3 प्रति किलोग्राम का मामूली इजाफा देखा गया, वहीं प्लेन सॉर्ट्स, बोल्डर्स और ब्रोकन्स जैसी चाय में ₹6-7 प्रति किलोग्राम की बड़ी बढ़त दर्ज की गई।
डस्ट टी की बाजार चाल:
लीफ टी की तुलना में CTC डस्ट मार्केट में मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली। जहां कुछ खास क्वालिटी वाली डस्ट ने प्रीमियम कीमत हासिल की, वहीं महंगी डस्ट टी और कुछ खास ऑर्थोडॉक्स ग्रेड्स की कीमतों में ₹2-5 प्रति किलोग्राम की मामूली गिरावट आई। इन मिले-जुले रुझानों से पता चलता है कि कुल मांग तो मजबूत है, लेकिन खरीदार पेश की जा रही डस्ट की लिक्वरिंग क्वालिटी के आधार पर अभी भी सेलेक्टिव हैं। जिन निवेशकों की दिलचस्पी साउथर्न टी एस्टेट्स में निवेश वाली कंपनियों में है, उन्हें बारिश के आंकड़े और नीलामी की कीमतों के रुझानों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये आने वाली तिमाहियों में कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।
