भारतीय ज्वैलरी मार्केट को राहत! सोने-चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट, 'सस्ता' हुआ सोना

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारतीय ज्वैलरी मार्केट को राहत! सोने-चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट, 'सस्ता' हुआ सोना
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भारतीय ज्वैलरी इंडस्ट्री को सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट से काफी राहत मिली है। इंडस्ट्री के लीडर्स का कहना है कि पहले की कीमतें खरीदारों के लिए टिकाऊ नहीं थीं।

ग्लोबल मार्केट में बड़ी गिरावट का असर

साल 2026 की शुरुआत में ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और दुनिया भर में आर्थिक ग्रोथ को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते निवेशक 'रिस्क-ऑफ' मोड में आ गए हैं। इसी वजह से सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में, जो 2025 के आखिर में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थीं, अब भारी करेक्शन आया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पहले के ये दाम फंडामेंटल के हिसाब से टिकाऊ नहीं थे।

ज्वैलरी सेक्टर में खुशी की लहर

इस मार्केट करेक्शन का भारतीय ज्वैलरी इंडस्ट्री को बेसब्री से इंतजार था। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सव्यसाची रे का कहना है कि सोने-चांदी के दाम अब खरीदारों के लिए 'टिकाऊ' हो गए हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों में यह तेजी केवल स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग की वजह से बढ़ी थी, जिसका फंडामेंटल से कोई लेना-देना नहीं था। ऊंचे दामों के कारण बिक्री कम हो गई थी, और इंडस्ट्री अब प्राइस स्टेबिलिटी से कंज्यूमर डिमांड को फिर से बढ़ाने की उम्मीद कर रही है।

गिरावट की रफ्तार पर चिंता

हालांकि, कीमतों में आई इस स्थिरता का इंडस्ट्री स्वागत कर रही है, लेकिन गिरावट की रफ़्तार चिंता का सबब बनी हुई है। सव्यसाची रे ने आगाह किया कि महज तीन दिनों में इतनी तेजी से दाम गिरना बाजार में 'खतरे' पैदा कर सकता है। इससे उन लोगों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी। GJEPC के मुताबिक, लोगों का इंटरेस्ट तो बना हुआ था, लेकिन इनकम ग्रोथ के मुकाबले दाम बहुत तेजी से बढ़ जाने के कारण खरीददारी टाल दी गई थी। अब उम्मीद है कि कीमतें वापस जनवरी की शुरुआत के स्तर पर आने से बिजनेस एक्टिविटी फिर से बढ़ेगी।

निवेश के फैसले में अभी जल्दबाजी नहीं

जहां तक निवेश की बात है, तो फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपना सकते हैं। प्रॉफ़िट-टेकिंग (Profit-taking) के चलते कई कमोडिटीज में आई गिरावट के बाद, निवेशक कीमती धातुओं में फिर से पैसा लगाने से पहले बाजार के और स्थिर होने का इंतजार करेंगे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में एक बॉटम बनने का इंतजार किया जा रहा है, जो शायद जनवरी की शुरुआत के स्तर के आसपास हो सकता है। शॉर्ट-टर्म में निवेश को लेकर थोड़ी नरमी दिख रही है, लेकिन GJEPC का मानना है कि लंबे समय में सोने-चांदी का भविष्य अच्छा है और कीमतें सप्लाई-डिमांड के हिसाब से ही चलेंगी, न कि स्पेकुलेशन के कारण।

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