FY26 में भारत के पैसिव फंड्स (Passive Funds) के टर्नओवर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गोल्ड और सिल्वर ETF ने कुल वॉल्यूम का लगभग **60%** हिस्सा हासिल किया। जून 2026 तक पैसिव फंड्स में कुल एसेट्स ₹14.82 ट्रिलियन तक पहुंच गए, क्योंकि निवेशक पारंपरिक इक्विटी की जगह कीमती धातुओं को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं।
Detailed Coverage
पैसिव निवेश में आया बड़ा बदलाव
भारत का पैसिव निवेश मार्केट (Passive Investment Market) एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जहां एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में ट्रेडिंग एक्टिविटी में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़े बताते हैं कि इन फंड्स का कुल डेली एवरेज टर्नओवर ₹4,577 करोड़ रहा। यह FY21 के ₹237 करोड़ से एक बड़ी छलांग है, जो दिखाता है कि निवेशक कितनी तेज़ी से अपने पोर्टफोलियो के लिए पैसिव प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहे हैं।
कमोडिटी-आधारित निवेश में तेज़ी
इस दौरान सबसे अहम ट्रेंड कमोडिटी ETFs का रहा, खासकर गोल्ड और सिल्वर को ट्रैक करने वाले। इस कैटेगरी में ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी तेज़ी आई, जो FY25 के ₹224 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹2,907 करोड़ हो गया। नतीजतन, कमोडिटी ETFs अब देश के कुल ETF टर्नओवर का लगभग 60% हिस्सा बन गए हैं। यह बदलाव भारतीय निवेशकों के बीच कीमती धातुओं के प्रति मजबूत रुझान को दर्शाता है, जो हेज (Hedge) या स्ट्रेटेजिक एसेट के तौर पर पारंपरिक इक्विटी-लिंक्ड पैसिव फंड्स की जगह ले रहे हैं।
पैसिव एसेट क्लासेस में ग्रोथ
कमोडिटी के अलावा, डेट ETFs (Debt ETFs) ने भी मार्केट में अपनी जगह बनाई है। डेट-फोकस्ड पैसिव प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग एक्टिविटी लगातार बढ़ी है, जो FY21 में ₹107 करोड़ से बढ़कर हालिया तिमाही में ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। इससे पता चलता है कि निवेशक अपने पैसिव होल्डिंग्स को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं और कीमती धातुओं वाले फंड्स के साथ-साथ डेट इंस्ट्रूमेंट्स में भी स्थिरता की तलाश कर रहे हैं।
कुल इंडस्ट्री एसेट्स और इनफ्लो
जून 2026 तक, पैसिव फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹14.82 ट्रिलियन तक पहुंच गया। फाइनेंशियल आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों की दिलचस्पी मज़बूत बनी हुई है, FY27 की पहली तिमाही में पैसिव स्कीम्स में नेट इनफ्लो ₹34,641 करोड़ रहा। गोल्ड ETFs ने FY26 में ₹68,868 करोड़ का नेट इनफ्लो आकर्षित किया, जबकि सिल्वर ETFs ने ₹30,412 करोड़ जुटाए।
निवेशकों के लिए आगे की मुख्य निगरानी यह होगी कि कीमती धातु ETFs में यह उच्च एकाग्रता बनी रहती है या नहीं। जहां पैसिव फंड्स कम लागत और पारदर्शिता प्रदान करते हैं, वहीं कमोडिटी-आधारित ETFs पर अत्यधिक निर्भरता पोर्टफोलियो को गोल्ड और सिल्वर की अंतर्निहित प्राइस वोलैटिलिटी (Price Volatility) के प्रति संवेदनशील बना सकती है। निवेशक यह देख सकते हैं कि अगर कीमती धातुओं की कीमतें गिरती हैं तो ये ETFs कैसा प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि इन ETFs की लिक्विडिटी और टर्नओवर सीधे ग्लोबल कमोडिटी साइकल्स और इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशंस (Inflation Expectations) के प्रति निवेशक की भावना से जुड़े होते हैं।
