ग्लोबल कैपिटल का बदलता मिजाज
पिछले कुछ हफ्तों में कमोडिटी मार्केट, खासकर चांदी (Silver) में आई गिरावट को एलारा कैपिटल (Elara Capital) 'कंसॉलिडेशन' का दौर बता रहा है, न कि डी-डॉलराइजेशन ट्रेंड के पूरी तरह से पलट जाने का संकेत। 29 जनवरी से 4 फरवरी के बीच के फंड फ्लो (Fund Flow) के आंकड़े दिखाते हैं कि निवेशक अभी भी इमर्जिंग मार्केट्स (EM) में पैसा लगा रहे हैं। पिछले हफ्ते $11 बिलियन का रिकॉर्ड इनफ्लो (Inflow) आने के बाद, इस हफ्ते भी $5 बिलियन EM इक्विटी फंड्स (Equity Funds) में आए हैं। यह दिखाता है कि भले ही कमोडिटी पर दबाव हो, लेकिन निवेशक डॉलर-आधारित एसेट्स (Assets) से इतर इमर्जिंग मार्केट्स की ओर अपना रुख बनाए हुए हैं।
एनर्जी सेक्टर की तूफानी तेजी और चांदी की स्थिरता
एनर्जी इक्विटी फंड्स (Energy Equity Funds) ने तो सितंबर 2008 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक इनफ्लो दर्ज की है, जहाँ $4 बिलियन का पैसा आया। एनर्जी सेलेक्ट सेक्टर SPDR फंड (XLE) इस मजबूती के दम पर अपने 52-हफ्ते के हाई (52-week high) के करीब ट्रेड कर रहा है, जिसकी कीमतें शुरुआती फरवरी 2026 में लगभग $51.44 से $53.36 के दायरे में थीं। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि बढ़ती तेल सप्लाई (Oil Supply) और कीमतों में संभावित गिरावट को देखते हुए, एनर्जी सेक्टर का अर्निंग्स साइकिल (Earnings Cycle) पीक (Peak) पर हो सकता है। वहीं, हालिया गिरावट के केंद्र में रही चांदी (Silver) में भी $1.5 बिलियन का इनफ्लो देखा गया है, जिससे इसकी स्थिति स्थिर हुई है। iShares Silver Trust (SLV) इस दौरान लगभग $63.59 से $68.88 के बीच अस्थिरता के साथ ट्रेड करता रहा।
इमर्जिंग मार्केट्स में मजबूती, भारत में शुरुआती स्थिरता के संकेत
कमोडिटी कीमतों में कमजोरी के बावजूद, ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (GEM) इक्विटी फंड्स (Equity Funds) में कैपिटल (Capital) का आना जारी रहा। Vanguard FTSE Emerging Markets ETF (VWO) लगभग $56.04 पर ट्रेड कर रहा है। 2025 में, EM इक्विटीज ने डेवलप्ड मार्केट्स (DM) को पीछे छोड़ दिया, FTSE इमर्जिंग इंडेक्स (FTSE Emerging Index) में 26.5% का रिटर्न आया, जबकि FTSE डेवलप्ड इंडेक्स (FTSE Developed Index) 22.8% ही बढ़ा। इसका मुख्य कारण बेहतर मैक्रो स्टेबिलिटी (Macro Stability) और वैल्यूएशन (Valuation) का बेहतर होना रहा। भारत के लिए, फंड फ्लो (Fund Flow) में कुछ राहत के संकेत मिले हैं। छह हफ्तों की लगातार निकासी (Outflows) के बाद, India-focused Funds (जैसे iShares MSCI India ETF - INDA, जो लगभग $53.04 पर ट्रेड कर रहा है) में $67 मिलियन का मामूली इनफ्लो हुआ है, जो शुरुआती स्थिरीकरण (Stabilization) की ओर इशारा करता है।
गहराई से विश्लेषण: वैल्यूएशन, मैक्रो फैक्टर्स और भविष्य का अनुमान
फिलहाल बाजार में एक दिलचस्प तस्वीर दिख रही है। एक तरफ तो कुछ सेक्टर्स में फंड फ्लो (Fund Flow) मजबूत है, वहीं दूसरी तरफ मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) दबाव भी बना हुआ है। एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) में मजबूत इनफ्लो के बावजूद, इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो (Ratio) लगभग 19.99 है, जबकि यूटिलिटीज (Utilities) का P/E रेश्यो लगभग 14.51 से 17.65 के बीच है। इमर्जिंग मार्केट (EM) इक्विटी, जैसे VWO और INDA, का P/E रेश्यो आमतौर पर डेवलप्ड मार्केट्स (DM) की तुलना में 30% से ज्यादा कम होता है, जो लगभग 14.39 से 17.83 (VWO के लिए) और 19.53 से 21.80 (INDA के लिए) के दायरे में है। यह दर्शाता है कि सेंटीमेंट (Sentiment) तो मजबूत है, लेकिन वैल्यूएशन (Valuation) पर भी नजर रखना जरूरी है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) जैसी संस्थाएं वैश्विक आर्थिक विकास (Global Economic Growth) में कमजोरी और बढ़ती तेल सप्लाई (Oil Surplus) के कारण 2025 और 2026 में कमोडिटी कीमतों में 7% की गिरावट का अनुमान लगा रही हैं। IMF भी 2026 में वैश्विक विकास दर 3.3% रहने की उम्मीद कर रहा है, लेकिन ट्रेड टेंशन (Trade Tensions) और भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारणों से जोखिम नीचे की ओर झुके हुए हैं। कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) ने एनर्जी ETFs (ETFs) को 'Strong Buy' से 'Hold' पर डाउनग्रेड (Downgrade) भी किया है, क्योंकि वे अर्निंग्स साइकिल के पीक (Peak) पर पहुंचने और तेल कीमतों में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में, डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization) और EM की मजबूती का रास्ता महंगाई (Inflation) की चाल और सेंट्रल बैंक की पॉलिसी (Central Bank Policy) पर निर्भर करेगा।