Onam से पहले Coconut Oil की कीमतों में भारी उछाल, जमाखोरी का शक

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Onam से पहले Coconut Oil की कीमतों में भारी उछाल, जमाखोरी का शक

Onam के त्यौहार से ठीक पहले केरल में Coconut Oil की कीमतों ने होश उड़ा दिए हैं। थोक बाज़ार में दाम ₹260 से ₹293 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं, रिटेल में यह ₹300 के पार बिक रहा है। इंडस्ट्री बॉडीज़ का आरोप है कि अच्छी फसल के बावजूद, सप्लाई की कमी नहीं बल्कि कृत्रिम तरीके से कोपरा (Copra) की जमाखोरी के कारण कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।

Onam से पहले क्यों महंगा हुआ Cooking Oil?

Onam के त्यौहार पर मांग बढ़ने के चलते वैसे ही लोकल डिमांड में 10% से 20% का उछाल आता है। लेकिन इस बार कीमतों में जो तेजी देखी जा रही है, वह सामान्य से कहीं ज़्यादा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और ट्रेडर्स का कहना है कि यह उछाल सप्लाई की कमी के कारण नहीं है। कोचीन ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन (COMA) के मुताबिक, उत्पादन राज्यों में फसल अच्छी रही है और खपत की ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं।

जमाखोरी का खेल?

तो फिर दाम क्यों बढ़ रहे हैं? आरोप है कि ट्रेड लॉबी, खासकर तमिलनाडु में, कोपरा का स्टॉक जमा कर रही हैं। वे Onam के पीक टाइम का फायदा उठाकर कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ा रहे हैं। जबकि, पिछले साल के मुकाबले इस साल अच्छी पैदावार के चलते नारियल और कोपरा की फिजिकल अवेलेबिलिटी (Physical Availability) भी स्थिर है।

सरकारी दखल और FMCG कंपनियों पर असर

कीमतों में इस अप्रत्याशित उछाल को देखते हुए सरकार को दखल देना पड़ा है। Kerafed और Supplyco जैसी सरकारी एजेंसियां कीमतों को कंट्रोल करने और आम आदमी को राहत देने की कोशिश कर रही हैं।

FMCG (Fast-Moving Consumer Goods) कंपनियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्थिति है, क्योंकि Coconut Oil उनका एक अहम कच्चा माल है। हालांकि, बड़ी कंपनियां अक्सर लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स (Long-term contracts) के ज़रिए अपनी लागत को हेज (Hedge) करती हैं, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से उनके मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, खासकर अगर वे बढ़े हुए खर्च को ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं।

आगे क्या?

बाज़ार की नज़र इस बात पर है कि सरकारी दखल और Onam के बाद मांग में कमी आने पर कीमतें सामान्य होती हैं या नहीं। त्यौहार खत्म होने के बाद, कीमतों को कंट्रोल करने के सरकारी उपायों की प्रभावशीलता और जमा किए गए स्टॉक के बाज़ार में आने की रफ़्तार यह तय करेगी कि मौजूदा अस्थिरता (Volatility) अस्थायी है या कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.