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Coal India Share: प्रोडक्शन घटा, मांग बढ़ी! भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराए बादल?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Coal India Share: प्रोडक्शन घटा, मांग बढ़ी! भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराए बादल?
Overview

FY26 में Coal India Limited की कई यूनिट्स में प्रोडक्शन (उत्पादन) में गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत में कोयले की डिमांड (मांग) बढ़ रही है और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं।

उत्पादन में कहां आई कमी?

Coal India Limited की सब्सिडियरी कंपनियों के लिए FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कई अहम यूनिट्स में प्रोडक्शन (उत्पादन) में खास कमी देखी गई। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में सबसे बड़ी गिरावट आई, जहाँ प्रोडक्शन 12.3% कम हो गया। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में 6.1% की कमी आई, जबकि वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) का प्रोडक्शन भी क्रमशः 8.8% और 3% घट गया।

हालांकि, कुछ सब्सिडियरी यूनिट्स ने ग्रोथ भी दर्ज की। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का प्रोडक्शन 5.3% बढ़ा, और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) में 1.1% की बढ़ोतरी हुई। लेकिन, इनগুলোর बढ़त कुल मिलाकर Parent Company के प्रोडक्शन में आई 1.7% की कमी को पूरा नहीं कर सकी। FY26 में कोल इंडिया लिमिटेड का कुल प्रोडक्शन घटकर 768.1 मिलियन टन रह गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में 781.1 मिलियन टन था।

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई बाधित हो रही है। गैस और LNG की ग्लोबल उपलब्धता कम होने से इंपोर्टेड कोयले (imported coal) की कीमतें भी बढ़ी हैं। ऐसे में, देश की ऊर्जा सुरक्षा (energy security) के लिए डोमेस्टिक कोयला प्रोडक्शन का महत्व और बढ़ जाता है।

पूर्व पावर सेक्रेटरी अनिल रज़दान (Anil Razdan) ने प्रोडक्शन टारगेट (targets) पूरा करने पर जोर देने की बजाय सही स्टोरेज (storage) की कमी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ टारगेट के लिए कोयला बनाना, बिना उचित स्टोरेज के, कोयले को खराब कर सकता है और सप्लाई चेन की दिक्कतों को बढ़ा सकता है।

हालांकि, यह भी सवाल बना हुआ है कि क्या कोल इंडिया लिमिटेड, जो देश के डोमेस्टिक कोयले का 80% से ज्यादा सप्लाई करती है, अपने कॉन्ट्रैक्ट (contractual) दायित्वों को पूरा कर पाई है। अभी तक पावर प्लांट्स और इंडस्ट्रियल यूजर्स के लिए सप्लाई की कोई बड़ी कमी रिपोर्ट नहीं हुई है।

रज़दान को उम्मीद है कि कोल इंडिया और प्राइवेट सेक्टर मिलकर गर्मी की पीक डिमांड (peak demand) और मॉन्सून (monsoon) से जुड़ी रुकावटों से निपटने के लिए पर्याप्त स्टॉक बना लेंगे।

वहीं, कोल इंडिया के पूर्व CMD सुतीर्थ भट्टाचार्य (Sutirtha Bhattacharya) की राय थोड़ी अलग है। उनका मानना है कि प्रोडक्शन टारगेट को मार्केट की जरूरत के हिसाब से तय करना चाहिए। उन्होंने गर्मी के दौरान सरप्लस स्टॉक (surplus stock) रखने से बचने और क्वालिटी पर फोकस करके ब्रांड लीडरशिप बनाने का सुझाव दिया। भट्टाचार्य ने कहा कि मौजूदा हाइड्रोकार्बन की कमी (hydrocarbon deficits) के कारण कोयले और रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) का मार्केट आउटलुक (market outlook) सुधरेगा।

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