तूफानी तेजी की वजहें
इस शानदार प्रदर्शन की मुख्य वजहें भारत में बिजली की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक तनाव हैं। अनुमान है कि 2030 तक देश में बिजली की मांग 6.4% सालाना की दर से बढ़ेगी, जिसमें कोयले की हिस्सेदारी 75% तक बनी रह सकती है। वहीं, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को डिस्टर्ब किया है, जिससे थर्मल कोल की मांग और कीमतें बढ़ी हैं। इससे कंपनी को ई-ऑक्शन (E-auction) प्रीमियम और ओवरऑल रिलाइजेशन (realizations) में फायदा हो सकता है।
नतीजे मिले-जुले, पर भविष्य पर भरोसा
फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में Coal India का नेट प्रॉफिट 12% बढ़कर ₹10,839 करोड़ रहा। रेवेन्यू भी 6% बढ़कर ₹46,490 करोड़ हुआ। हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे मिले-जुले रहे, जिसमें नेट प्रॉफिट 12% घटा और रेवेन्यू सपाट रहा। तिमाही में प्रॉफिट बढ़ने का एक कारण कर्मचारी लागत में 12.8% की कमी आना भी था।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट की राय
Coal India का शेयर वैल्यूएशन (Valuation) अपने कई सरकारी साथियों जैसे Vedanta, Hindustan Aeronautics और Power Grid Corporation से काफी कम है। कंपनी करीब 9.4x के P/E (Price-to-Earnings) पर ट्रेड कर रही है। इसके बावजूद, एनालिस्ट (Analysts) कंपनी के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। ब्रोकरेज हाउस Emkay ने ₹475 और ICICI Securities ने ₹550 का टारगेट प्राइस दिया है। कंपनी की 6% की डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) भी निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
चुनौतियां भी हैं
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। कंपनी के पिट-हेड इन्वेंटरी (pit-head inventory) में 21% का इजाफा हुआ है, जो अब 130 मिलियन टन हो गई है। इससे बिक्री और ई-ऑक्शन प्रीमियम पर असर पड़ सकता है। डीजल जैसे इनपुट कॉस्ट (input costs) में बढ़ोतरी से भी मार्जिन पर दबाव बन सकता है। साथ ही, लंबे समय में रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की बढ़ती क्षमता कोयले की मांग के लिए एक चुनौती पेश करेगी।
