कोल इंडिया (Coal India) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं, जो मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 5% घटकर ₹349.24 बिलियन पर आ गया। वहीं, समेकित नेट प्रॉफिट (consolidated net profit) में 16% की गिरावट आई और यह ₹7,166 करोड़ दर्ज किया गया। इस प्रॉफिट में कमी की एक मुख्य वजह एग्जीक्यूटिव पे स्केल अपग्रेडेशन (executive pay scale upgradation) के लिए ₹2,201 करोड़ का एक बार का प्रोविजन (one-time provision) रहा। हालाँकि, कंपनी ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) में गजब का सुधार दिखाया है। EBITDA प्रति टन (EBITDA per tonne) में तिमाही-दर-तिमाही (sequential) 52% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह ₹534 पर पहुँच गया। कंपनी ने OBR खर्चों (OBR expenses) को छोड़कर एडजस्टेड EBITDA (adjusted EBITDA) में भी तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 72% की वृद्धि दर्ज की, जो ₹100.7 बिलियन रहा।
मार्केट एनालिस्ट्स (market analysts) की राय इस नतीजे पर बंटी हुई है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने कोल इंडिया पर 'BUY' रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए ₹500 का टारगेट प्राइस (target price) दिया है। यह टारगेट सितंबर 2027 के अनुमानों पर आधारित है, जहाँ कंपनी का EV/EBITDA मल्टीपल 5.5x रहने की उम्मीद है। हालाँकि, दूसरे एनालिस्ट्स की राय थोड़ी सतर्क है। करीब 20 एनालिस्ट्स का औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹409 से ₹438 के बीच है, जो 'Neutral' या 'Outperform' की तरफ इशारा करता है। यह दिखाता है कि जहाँ Motilal Oswal भविष्य को लेकर उत्साहित है, वहीं बाकी बाज़ार की नज़रें मौजूदा ट्रेंड्स पर हैं।
इस मजबूती के बावजूद, कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। साल-दर-साल रेवेन्यू और प्रॉफिट में गिरावट, बढ़ता एम्प्लॉई खर्च (employee cost) - जो 22% बढ़ा है - और एक बार के प्रोविजन का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ा है। कोल इंडिया काफी हद तक थर्मल कोल पर निर्भर है, जो इसे पर्यावरण नीति (environmental policy) में बदलावों और एनर्जी ट्रांज़िशन (energy transition) के लॉन्ग-टर्म रिस्क (long-term risk) के प्रति संवेदनशील बनाता है। रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) का बढ़ता इस्तेमाल और दूसरे डोमेस्टिक कोल प्रोड्यूसर्स से कॉम्पिटिशन (competition) भी कंपनी के मार्केट शेयर (market share) और प्राइसिंग पावर (pricing power) के लिए खतरे पैदा करते हैं।
आगे की बात करें तो, भारतीय कोयला बाज़ार में 2030 तक सालाना 7.5% की दर से बढ़ोतरी का अनुमान है, क्योंकि देश की एनर्जी डिमांड (energy demand) लगातार बढ़ रही है। कोल इंडिया, सबसे बड़े प्रोड्यूसर के तौर पर, इस डिमांड का फायदा उठाने के लिए तैयार है। कंपनी डायवर्सिफिकेशन (diversification) पर भी जोर दे रही है। सोलर एनर्जी (solar energy) में कैपेक्स (capex) बढ़ाकर ₹961 करोड़ तक ले जाया गया है। इसके अलावा, कंपनी क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals) और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में विस्तार की संभावनाएं तलाश रही है। शेयरधारकों को रिटर्न देने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत, कंपनी ने FY26 के लिए ₹5.50 प्रति शेयर का तीसरा अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) भी घोषित किया है।