देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India Limited (CIL), अब सिर्फ कोयले तक सीमित नहीं रहना चाहती। एनर्जी सेक्टर में हो रहे बड़े बदलावों को देखते हुए, कंपनी ने अपने कारोबार को नया रूप देने का फैसला किया है।
ग्लोबल मिनरल्स में CIL का प्रवेश
CIL के बोर्ड ने चिली में एक इंटरमीडिएट होल्डिंग कंपनी (IHC) बनाने को मंजूरी दे दी है। यह कंपनी चिली में मौजूद लिथियम और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स की खोज और विकास का काम देखेगी। CIL इस नई कंपनी की 100% मालिक होगी। इसके साथ ही, कंपनी ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे दूसरे खनिज-समृद्ध देशों में भी अधिग्रहण के मौके तलाश रही है। यह कदम भविष्य की एनर्जी और टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी इन मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी चाल है, जिसका बाजार बारीकी से मूल्यांकन करेगा।
केमिकल क्षेत्र में बड़ा निवेश
वहीं, देश के भीतर CIL अपनी सहायक कंपनी भारत कोल गैसिफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) में ₹3,189.54 करोड़ का भारी निवेश कर रही है। यह पैसा ओडिशा में एक बड़ा कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्रोजेक्ट लगाने के लिए इस्तेमाल होगा। इस प्लांट की सालाना क्षमता 0.66 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) रहने का अनुमान है और यह BHEL की गैसिफिकेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगा। इस प्रोजेक्ट से CIL अपनी माइनिंग के लिए जरूरी एक्सप्लोसिव्स (विस्फोटक) की सप्लाई को बेहतर बना पाएगी और भारत की अमोनियम नाइट्रेट के आयात पर निर्भरता भी कम होगी। यह केमिकल खाद और इंडस्ट्रियल, दोनों ही कामों में इस्तेमाल होता है।
चुनौतियाँ और प्रतिस्पर्धा
Coal India का मार्केट कैप फिलहाल करीब ₹2.67 लाख करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 8.5x के आसपास है। ऐसे में, नए और कैपिटल-इंटेंसिव डोमेन में उतरना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। Vedanta और Adani Group जैसी कंपनियाँ भी क्रिटिकल मिनरल्स में पहले से बड़े निवेश कर रही हैं। कोयला माइनिंग के मुकाबले, चिली में मिनरल एक्सप्लोरेशन और ओडिशा के बड़े केमिकल प्लांट के सफल होने में ज्यादा जोखिम और लंबा समय लगने की संभावना है।
विश्लेषकों की राय
एनालिस्ट्स (Analysts) CIL के इस डाइवर्सिफिकेशन प्लान को कंपनी की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी के लिए अच्छा मान रहे हैं। हालांकि, वे इस बात को लेकर थोड़ा सतर्क हैं कि कंपनी इन प्रोजेक्ट्स को कितनी कुशलता से पूरा कर पाती है। फिलहाल, कई एनालिस्ट्स ने Coal India के लिए ₹409 से ₹424 का टारगेट प्राइस दिया है और 'न्यूट्रल' या 'होल्ड' की कंसेंसस रेटिंग (Consensus Rating) बरकरार रखी है। कंपनी का 6% से ज्यादा का डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) निवेशकों को आकर्षित करता रहेगा। बाजार अब चिली वाली कंपनी के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) की टाइमलाइन और ओडिशा प्लांट के निर्माण पर बारीकी से नजर रखेगा, ताकि कंपनी इन नए वेंचर्स से ठोस रिटर्न पेश कर सके।
