चीन की प्रोडक्शन कट से भारतीय स्टील कंपनियों को मिला बूस्ट
भारतीय स्टील दिग्गज Tata Steel, SAIL और Jindal Stainless के शेयरों में इन दिनों रौनक देखी जा रही है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है दुनिया के सबसे बड़े स्टील उत्पादक चीन द्वारा अपने उत्पादन में की गई जबरदस्त कटौती। चीन के इस कदम से ग्लोबल स्टील सप्लाई में कमी आई है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और भारतीय कंपनियों के लिए एक सुनहरा मौका बन गया है।
भले ही कोकिंग कोल जैसे कच्चे माल और शिपिंग की लागत बढ़ गई हो, लेकिन इन कंपनियों ने शानदार कॉस्ट कंट्रोल और बिक्री की मात्रा बढ़ाकर तगड़ा मुनाफा कमाया है।
चीन की सप्लाई घटने से ग्लोबल कीमतें चढ़ीं
Worldsteel.org के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में चीन का स्टील आउटपुट पिछले साल की तुलना में 4.6% घट गया। सप्लाई में इस कमी का सीधा असर ग्लोबल स्टील की कीमतों पर पड़ा है, जिसका सीधा फायदा Tata Steel, SAIL और Jindal Stainless जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतों के चलते ये कंपनियां इनपुट कॉस्ट, जैसे कोकिंग कोल की कीमतों में 11% (Q4 FY26 में $225 प्रति टन) की बढ़ोतरी और बढ़ते फ्रेट व लॉजिस्टिक्स खर्चों को आसानी से झेल पा रही हैं।
भारतीय स्टील कंपनियों के दमदार नतीजे
SAIL ने मार्च 2026 तिमाही के लिए ₹1,835.5 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 46.8% ज्यादा है। वहीं, रेवेन्यू 5.1% बढ़कर ₹30,813.5 करोड़ हो गया। बिक्री की मात्रा में बढ़ोतरी और ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में 240 बेसिस पॉइंट का इजाफा (जो 14.3% तक पहुंच गया) इसके पीछे के मुख्य कारण रहे।
Tata Steel का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट इसी तिमाही में 147% की छलांग लगाकर ₹2,965 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के भारतीय ऑपरेशंस से 6.19 मिलियन टन की सप्लाई हुई, जिससे कुल स्टील डिलीवरी 8.72 मिलियन टन रही। कंपनी द्वारा बेचे गए स्टील की कीमत में करीब 7.5% की बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹72,560 प्रति टन रही। कंपनी यूके में पोर्ट टैल्बोट फैसिलिटी पर £1.25 बिलियन का निवेश भी कर रही है।
Jindal Stainless का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट Q4 FY26 में 41.4% बढ़कर ₹834.4 करोड़ हो गया। कंपनी का रेवेन्यू 11.2% बढ़कर ₹11,337 करोड़ रहा, जिसका मुख्य कारण हाई-ग्रेड स्टेनलेस स्टील प्रोडक्ट्स की कीमतों में 11.4% की बढ़ोतरी है, जो ₹1.76 लाख प्रति टन तक पहुंच गईं। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 250 बेसिस पॉइंट सुधरकर 12.9% पर आ गया।
वैल्यूएशन्स और सेक्टर का भविष्य
FY26 के लिए इन कंपनियों के वैल्यूएशन्स आकर्षक दिख रहे हैं। SAIL का एंटरप्राइज वैल्यू टू EBITDA 7.4 गुना, Tata Steel का 9.2 गुना और Jindal Stainless का 11 गुना है। हालांकि, Jindal Stainless का P/E रेशियो (लगभग 19.07), Tata Steel का (24.75) और SAIL का (23.99) है। ये वैल्यूएशन्स मेटल और माइनिंग सेक्टर के लिए काफी कॉम्पिटिटिव माने जा रहे हैं, जिसके 10-13% तक बढ़ने का अनुमान है।
संभावित जोखिम और विश्लेषकों की राय
निवेशकों को इनपुट लागतों, खासकर कोकिंग कोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति सचेत रहना चाहिए। इसके अलावा, मध्य पूर्व का संकट भी घरेलू आर्थिक विकास और स्टील की मांग पर असर डाल सकता है। Nuvama के विश्लेषकों का मानना है कि SAIL की प्रॉफिटेबिलिटी शायद अपने चरम पर पहुंच चुकी है और विस्तार योजनाओं के कारण इसका कर्ज बढ़ सकता है, जिसके चलते उन्होंने 'Reduce' रेटिंग के साथ ₹139 का टारगेट प्राइस दिया है।
कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि Jindal Stainless के शेयर की कीमत उसकी अर्निंग ग्रोथ से आगे निकल गई है। वहीं, Tata Steel के लिए, जहां भारतीय ऑपरेशंस मजबूत हैं, वहीं यूरोपीय कारोबार दबाव में है। JPMorgan ने Tata Steel को डाउनग्रेड किया है।
आगे की राह
कुल मिलाकर, इंडस्ट्री के पूर्वानुमान बताते हैं कि भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ जारी रहेगी। विश्लेषकों की राय ज्यादातर पॉजिटिव है, लेकिन इनपुट लागतों और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बाजार चीन के उत्पादन समायोजन और ऑटोमोटिव व इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों से आने वाली मांग पर बारीकी से नजर रखेगा।
