China US Oil Deal: टैरिफ की मार, क्या अमेरिका से तेल खरीदेगा चीन?

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AuthorMehul Desai|Published at:
China US Oil Deal: टैरिफ की मार, क्या अमेरिका से तेल खरीदेगा चीन?
Overview

चीन, मध्य पूर्व में सप्लाई (Supply) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका से तेल (Oil) खरीदने पर विचार कर रहा है। हालांकि, **20%** के इंपोर्ट टैरिफ (Import Tariff) और दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव (Trade Friction) इस डील (Deal) में बड़ी रुकावटें पैदा कर रहे हैं।

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मध्य पूर्व की अस्थिरता से बढ़ी चीन की चिंता, अमेरिका से तेल आयात पर विचार

चीन अपनी एनर्जी सप्लाई (Energy Supply) को सुरक्षित करने की कोशिशों में जुटा है। मध्य पूर्व में बढ़ते जिओपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risk) और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसी महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स (Shipping Routes) पर अस्थिरता के कारण, चीन अब अमेरिका से कच्चे तेल (Crude Oil) के इम्पोर्ट (Import) को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

जिओपॉलिटिक्स से उछले तेल के दाम

इस समय कच्चे तेल की कीमतें जिओपॉलिटिक्स (Geopolitics) की वजह से बढ़ी हुई हैं। 14 मई 2026 को वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग $100.78 प्रति बैरल (Barrel) और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $105.42 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में संभावित सप्लाई रुकावटों की चिंता इन दामों को बढ़ा रही है।

अमेरिका की प्रोडक्शन क्षमता और चीन का लक्ष्य

अमेरिका, जो 2025 में 13.58 मिलियन बैरल से ज्यादा रोजाना के प्रोडक्शन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड प्रोड्यूसर (Crude Producer) था, अपनी एक्सपोर्ट्स (Exports) बढ़ा सकता है। चीन की मंशा हमेशा से अपने सप्लायर्स (Suppliers) को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने की रही है, ताकि वह केवल रूस, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे कुछ ही देशों पर निर्भर न रहे।

सबसे बड़ी रुकावट: 20% टैरिफ और व्यापारिक युद्ध

लेकिन, अमेरिका और चीन के बीच ऑयल ट्रेड (Oil Trade) 2025 के मध्य में लगभग शून्य हो गया था, जब चीन ने अमेरिकी कच्चे तेल पर 20% का इंपोर्ट टैरिफ (Import Tariff) लगा दिया था। यह उस बड़े व्यापारिक विवाद (Trade Dispute) का हिस्सा है, जिसमें 2025 तक अमेरिका ने चीनी गुड्स (Goods) पर लगभग 48% टैरिफ लगा दिया था।

चीन के पास पर्याप्त स्टॉक, पर टैरिफ हटाना जरूरी

चीन के पास कम से कम 96 दिनों के लिए पर्याप्त ऑयल स्टॉक्स (Oil Stocks) हैं, लेकिन अमेरिका से सप्लाई फिर से शुरू करने के लिए इन टैरिफ्स को हटाना जरूरी है। यह मुश्किल है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद अभी भी बने हुए हैं।

एनालिस्ट्स को है संदेह

एनालिस्ट्स (Analysts) को चीन द्वारा अमेरिका पर लंबे समय तक निर्भर रहने पर संदेह है। बीजिंग अमेरिका को एक अविश्वसनीय पार्टनर मानता है और एनर्जी इंडिपेंडेंस (Energy Independence) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, खासकर रूस और मध्य एशिया से ओवरलैंड रूट्स (Overland Routes) के जरिए। मौजूदा 20% टैरिफ एक बड़ी आर्थिक बाधा बना हुआ है।

पिछली घटनाओं ने दिखाई खतरे की घंटी

मार्च 2026 में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में हुई पिछली रुकावटों ने ब्रेंट क्रूड को $120 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया था, जो ग्लोबल एनर्जी फ्लो (Global Energy Flow) को ब्लॉक करने की क्षमता दिखाता है। टैरिफ्स अक्सर रिटेलिएशन (Retaliation) का कारण बनते हैं और मार्केट चेंजेज (Market Changes) को सीमित करते हैं। 2025 में अमेरिकी टैरिफ्स के कुछ गुड्स पर 145% तक पहुंचने से ट्रेड वॉल्यूम (Trade Volume) कम हुआ था।

भविष्य की राह मुश्किल

आईएनजी (ING) जैसे एनालिस्ट्स मानते हैं कि ऑयल प्राइसेस (Oil Prices) इस समय 'वेट-एंड-सी मोड' (Wait-and-see mode) में हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) को एनर्जी डिमांड प्रेशर (Energy Demand Pressure) के कारण चीन के लिए शॉर्ट-टर्म एक्सपोर्ट स्लोडाउन (Export Slowdown) की उम्मीद है, लेकिन वे एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) पर इसके लॉन्ग-टर्म फोकस से फायदा देख रहे हैं। अमेरिका-चीन एनर्जी ट्रेड (Energy Trade) में किसी भी महत्वपूर्ण उछाल के लिए टैरिफ्स का पूरी तरह से हटना और जिओपॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी (Geopolitical Instability) का खत्म होना जरूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.