चीन के एनर्जी प्लानर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में **260** और **250 युआन** प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की है। ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें **$100** के पार जाने के बावजूद चीन ने महंगाई के डर से बढ़ोतरी को फॉर्मूले से कम रखा है।
महंगाई बनाम सरकार की सख्ती
चीन के नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने 12 सितंबर, 2026 से प्रभावी नई कीमतें लागू करने का ऐलान किया है। हैरानी की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पेट्रोल में 435 युआन और डीजल में 420 युआन की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इसे क्रमशः 260 युआन और 250 युआन तक ही सीमित रखा है। मध्य पूर्व में तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के चलते कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है, जिसका सीधा दबाव घरेलू बाजार पर है।
रिफाइनरी कंपनियों पर असर
सरकारी तेल कंपनियों जैसे PetroChina, Sinopec और CNOOC के लिए यह बड़ी चुनौती है। इन कंपनियों को कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर खरीदना पड़ता है, लेकिन सरकार द्वारा तय की गई कैप के कारण ये पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों से मनचाही कीमत वसूल नहीं सकतीं। इससे इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ना तय है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह इस साल का 11वां बदलाव है। यदि कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो चीनी कंपनियों के फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में मार्जिन का दबाव साफ दिखेगा। कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए यह एक संकेत है कि चीन सरकार महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रिफाइनर्स के हितों से समझौता करने के लिए तैयार है। आने वाली तिमाही के नतीजे यह तय करेंगे कि इन कंपनियों का मार्जिन कितना सुरक्षित है।
