US Soybean: चीन ने बरकरार रखा 10% टैरिफ, ट्रेड वॉर में 'सोयाबीन' बना सबसे बड़ा हथियार

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AuthorMehul Desai|Published at:
US Soybean: चीन ने बरकरार रखा 10% टैरिफ, ट्रेड वॉर में 'सोयाबीन' बना सबसे बड़ा हथियार

चीन ने अमेरिका से आने वाले कॉर्न, गेहूं और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क घटा दिया है, लेकिन सोयाबीन पर **10%** का टैरिफ बरकरार रखा है। बीजिंग की यह रणनीतिक चाल निजी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है।

बीजिंग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर राहत दी है, लेकिन सोयाबीन को अभी भी अपने 'डिप्लोमैटिक कार्ड' के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। सरकार ने $17 बिलियन मूल्य के अन्य कृषि उत्पादों पर ड्यूटी तो कम कर दी है, लेकिन सोयाबीन पर 10% की अतिरिक्त लागत बरकरार रखी है।

निजी कंपनियों पर दबाव

चीन की इस नीति का सबसे ज्यादा असर उन निजी क्रशर्स (crushers) पर पड़ रहा है जो अमेरिका से सोयाबीन आयात करते हैं। यह 10% का अतिरिक्त बोझ उनकी लागत को काफी बढ़ा देता है, जिससे वे अन्य देशों से आने वाले सोयाबीन के मुकाबले कमजोर पड़ जाते हैं। हालांकि, इसके उलट चीन की सरकारी कंपनियां जैसे Sinograin और COFCO ने अब तक 12 मिलियन मीट्रिक टन अमेरिकी सोयाबीन की खरीद की है। ये सरकारी कंपनियां टैरिफ का बोझ खुद उठा लेती हैं, जिससे चीन का मार्केट में दबदबा बना रहता है।

कमोडिटी मार्केट के लिए संकेत

यह दोहरी स्थिति ग्लोबल कमोडिटी मार्केट को काफी संवेदनशील बना रही है। सोयाबीन की कीमतें अब पूरी तरह से ट्रेड पॉलिसी और कूटनीतिक बातचीत पर टिकी हैं। किसी भी छोटे से बदलाव का असर ग्लोबल सोयाबीन सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए अब सिर्फ आयात का वॉल्यूम देखना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि भविष्य में टैरिफ को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है, क्योंकि सोयाबीन बीजिंग के लिए आर्थिक ताकत दिखाने का सबसे प्रमुख जरिया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.