People's Bank of China ने सोने के भंडार में लगातार 22वें महीने इजाफा किया है, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर **2,387 टन** तक पहुंच गया है। ग्लोबल स्तर पर डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्रीय बैंक गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन निवेशकों को सोने के 'नॉन-यील्डिंग' एसेट होने के जोखिम को भी समझना चाहिए।
दुनियाभर के केंद्रीय बैंक तेजी से गोल्ड जमा कर रहे हैं। अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, People's Bank of China (PBOC) इस होड़ में सबसे आगे है। चीन के कुल गोल्ड होल्डिंग 2,387 टन तक पहुंच गई है, जो उसके कुल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का लगभग 9% है। यह कदम राष्ट्रीय रिजर्व मैनेजमेंट की एक सोची-समझी लॉन्ग-टर्म रणनीति का हिस्सा है।
क्यों सोना खरीद रहे हैं केंद्रीय बैंक?
दुनियाभर के देश अपनी डॉलर आधारित संपत्ति पर निर्भरता घटाकर रिजर्व को डायवर्सिफाई करना चाहते हैं। यह रणनीति जियोपॉलिटिकल अस्थिरता, संभावित प्रतिबंधों और करेंसी में उतार-चढ़ाव के खिलाफ एक बड़े 'हेज' (Hedge) के रूप में काम करती है। इसका मुख्य मकसद नेशनल बैलेंस शीट को मजबूती देना है।
ग्लोबल मार्केट की तस्वीर
- National Bank of Poland: इसने अगस्त में 8 टन सोना खरीदा है, जिससे इस साल की कुल खरीदारी 98 टन हो गई है। उनका लक्ष्य 700 टन तक पहुंचने का है।
- Central Bank of Uzbekistan: इनके रिजर्व का लगभग 90% अब सोना ही है।
- Central Bank of Russia: इसके उलट, रूस ने अपने बजट घाटे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण इस साल सोना बेचा है।
निवेशकों के लिए सबक (Investment Warning)
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि सोना एक 'नॉन-यील्डिंग' एसेट है, यानी इस पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। जब दुनिया में ब्याज दरें (Interest Rates) ऊंची होती हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है, जिससे इसके भाव में गिरावट या भारी वोलैटिलिटी देखी जा सकती है। बाजार फिलहाल केंद्रीय बैंकों की जबरदस्त मांग और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी के बीच फंसा हुआ है। भविष्य में निवेशकों की नजर U.S. Federal Reserve की चालों पर टिकी रहेगी।
