Central Banks Gold Buying: जून 2026 में सेंट्रल बैंकों ने खरीदा **51 टन** सोना!

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Central Banks Gold Buying: जून 2026 में सेंट्रल बैंकों ने खरीदा **51 टन** सोना!

साल 2026 के जून महीने में दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने **51 टन** सोना खरीदा है। यह खरीदारी दूसरी तिमाही में **289 टन** के रिकॉर्ड जमावड़े का हिस्सा है। पोलैंड और चीन जैसे देशों ने जहां अपने रिजर्व बढ़ाए, वहीं कुछ अन्य देशों ने बजट घाटे और करेंसी दबाव को मैनेज करने के लिए सोना बेचा। सेंट्रल बैंकों की यह लगातार मांग सोने की कीमतों के लिए एक अहम सपोर्ट बनी हुई है, खासकर जनवरी के हाई लेवल से करेक्शन के बाद।

सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीदारी का पूरा हाल

साल 2026 के जून महीने में ग्लोबल सेंट्रल बैंकों ने अपने गोल्ड रिजर्व में 51 टन का इजाफा किया है। यह लगातार खरीदारी का वो ट्रेंड है जिसने सोने की कीमतों को एक सपोर्ट लेवल दिया है। इस एक महीने की खरीदारी की वजह से दूसरी तिमाही में कुल जमावड़ा 289 टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 62% ज्यादा है। निवेशकों के लिए यह डेटा ऑफिशियल सेक्टर की मांग और बाजार की उस भावना के बीच के अंतर को दिखाता है, जो इंटरेस्ट रेट की उम्मीदों से प्रभावित है।

बड़े खरीदार और बेचने वाले

सोने की यह खरीद कुछ खास देशों में ही केंद्रित है। पोलैंड और चीन इस जमावड़े में सबसे आगे रहे। पोलैंड के नेशनल बैंक ने लगातार खरीदारी की है, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने अपने रिजर्व में इजाफा करने का लंबा सिलसिला जारी रखा है। चीन सोने को पारंपरिक करेंसी होल्डिंग्स से अलग एक स्ट्रेटेजिक एसेट के तौर पर देखता है।

दूसरी ओर, कुछ सेंट्रल बैंकों ने नेट सेलर के तौर पर काम किया है। रूस और तुर्की ने 2026 की पहली छमाही में सोना बेचा है। रूस के लिए, सोना बेचना बजट घाटे को मैनेज करने और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से निपटने का एक तरीका बन गया है, खासकर तेल और गैस की कमाई पर। तुर्की की यह गतिविधि घरेलू करेंसी को सहारा देने से जुड़ी है, जहां सोना बेचने या स्वैप करने से लीरा को सपोर्ट करने के लिए लिक्विडिटी मिलती है।

बाजार पर असर और कीमतों में करेक्शन

साल 2026 में सोने के बाजार में एक करेक्शन देखा गया है। कीमतें जनवरी के अपने पीक लगभग $5,598 प्रति औंस से घटकर जून तक $4,000 से $4,100 की रेंज में आ गईं। इस गिरावट में निवेशकों की प्रतिक्रिया भी शामिल है, जो फेडरल रिजर्व की इंटरेस्ट रेट नीतियों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बदलावों पर रिएक्ट कर रहे हैं।

सेंट्रल बैंकों की खरीदारी स्थिरता प्रदान करती है, लेकिन आगे चलकर जोखिम भी हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सर्वे में 89% रिजर्व मैनेजर अगले 12 महीनों में अपनी होल्डिंग्स बढ़ाने का इरादा रखते हैं। हालांकि, अगर सेंट्रल बैंक अपनी खरीदारी धीमी करते हैं, तो बाजार वेस्टर्न गोल्ड ईटीएफ (ETF) से आउटफ्लो के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है, जो रियल इंटरेस्ट रेट और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के प्रति काफी संवेदनशील हैं।

रिटेल और ज्वेलरी खरीदारों के लिए, मौजूदा कीमतें इस साल की शुरुआत के पीक की तुलना में काफी कम हैं। हालांकि, ऊंची कीमतें ज्वेलरी की मांग की मात्रा के लिए अभी भी एक चुनौती बनी हुई हैं। भविष्य में, निवेशकों के लिए मुख्य अपडेट यह देखना होगा कि क्या ऑफिशियल सेक्टर की मांग ईटीएफ (ETF) की संभावित बिकवाली की भरपाई करने के लिए पर्याप्त मजबूत रहती है, क्योंकि बाकी साल के दौरान ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी का विकास जारी रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.