केरल के नीलामी केंद्रों में इलायची की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर **₹3,200** प्रति किलो पर पहुंच गई हैं। त्योहारी सीजन की मांग और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण मार्केट में हलचल तेज है।
बाजार में क्यों है तेजी?
इलायची के दाम में यह उछाल मुख्य रूप से त्योहारी सीजन की भारी मांग के कारण है। हालांकि जून और जुलाई के दौरान इडुक्की क्षेत्र में कम बारिश के चलते फसल को लेकर डर था, लेकिन बाद में स्थिति सुधरने से पैदावार तो संभली, फिर भी सप्लाई साइड अभी भी तंग है, जो कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए हुए है।
बायर का सतर्क रुख
कीमतें ₹3,200 प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर होने के कारण थोक खरीदार फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। बहुत से व्यापारी बड़े स्टॉक जमा करने के बजाय 'हैंड-टू-माउथ' (जरूरत भर की खरीदारी) की रणनीति अपना रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर कीमतें और बढ़ीं, तो डिमांड में बड़ी गिरावट आ सकती है या उपभोक्ता किसी सस्ते विकल्प की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।
ग्लोबल मार्केट की मुश्किलें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ग्वाटेमाला में आई सप्लाई की कमी के कारण भारतीय इलायची की मांग तो है, लेकिन एक्सपोर्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रहा है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के कारण शिपिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत काफी बढ़ गई है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल शॉर्टेज का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब बाजार की नजरें पूरी तरह से मानसून और मौसम पर टिकी हैं। एल् नीनो (El Niño) और उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश अगले साल की फसल की क्वालिटी और वॉल्यूम तय करेगी। निवेशकों के लिए अभी सप्लाई और डिमांड का संतुलन देखना सबसे अहम होगा।
