सरकार ने सोने के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। CBIC ने गोल्ड की इंपोर्ट टैरिफ वैल्यू को **$1,395** से बढ़ाकर **$1,500** प्रति 10 ग्राम कर दिया है। इस बदलाव का सीधा असर कस्टम ड्यूटी और ज्वेलरी कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।
क्या है नया बदलाव?
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने 26 अगस्त, 2026 से सोने की इंपोर्ट टैरिफ वैल्यू में बदलाव किया है। पहले यह वैल्यू $1,395 थी, जिसे अब बढ़ाकर $1,500 प्रति 10 ग्राम कर दिया गया है। यह एक प्रक्रियात्मक कदम है, जिसका इस्तेमाल सरकार कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) की गणना के लिए करती है ताकि टैक्स को ग्लोबल मार्केट की कीमतों के साथ तालमेल में रखा जा सके।
ज्वेलरी सेक्टर पर असर
भारत की ज्वेलरी कंपनियों और बड़े इंपोर्टर्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट है। टैरिफ वैल्यू बढ़ने का मतलब है कि अब इंपोर्टेड गोल्ड पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी का बेस प्राइस बढ़ जाएगा। अब कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि क्या वे बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद झेलकर अपने मुनाफे (Profit Margin) को कम करेंगी, या फिर कीमतों को बढ़ाकर इसका भार ग्राहकों पर डालेंगी। भारत में गोल्ड ज्वेलरी का बाजार कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील (Price Sensitive) है, इसलिए बढ़ती कीमतों का सीधा असर डिमांड पर पड़ सकता है।
अन्य कमोडिटीज की स्थिति
गोल्ड के अलावा सरकार ने अन्य कमोडिटीज के मामले में राहत दी है। चांदी (Silver) की टैरिफ वैल्यू को $2,097 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रखा गया है। इसके साथ ही एडिबल ऑइल्स और ब्रास स्क्रैप जैसे औद्योगिक कच्चे माल की वैल्यू में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह साफ है कि सरकार का यह कदम केवल सोने के आयात को लेकर ही लक्षित था।
निवेशकों को अब कंपनियों के अगले मैनेजमेंट कमेंट्री और क्वार्टरली नतीजों पर नजर रखनी चाहिए, जहां यह साफ होगा कि बढ़ती इन्वेंट्री कॉस्ट और बदलती इंपोर्ट डायनेमिक्स का असर उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर कितना हुआ है।
