Multi Commodity Exchange (MCX) पर गोल्ड और सिल्वर के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक अब फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और ईरान के भू-राजनीतिक तनाव के बीच फंसे हुए हैं।
महंगी धातुओं के लिए महीने की शुरुआत सुस्त रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स अपने हालिया हाई से नीचे आ गए हैं। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹6,157 गिरकर ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में ₹9,893 की बड़ी गिरावट देखी गई और यह ₹2.36 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई है।
बाजार पर फेड की मार
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता है। 28 अगस्त, 2026 को जैक्सन होल संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने सर्विस इन्फ्लेशन पर चिंता जताई। CME FedWatch टूल के डेटा के अनुसार, सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना अब 48% तक पहुंच गई है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो गोल्ड की चमक फीकी पड़ जाती है क्योंकि सरकारी बॉन्ड्स जैसे यील्ड-बेयरिंग एसेट्स निवेशकों को ज्यादा आकर्षित करते हैं।
ईरान तनाव और जिओपॉलिटिकल रिस्क
ईरान के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिका द्वारा नए सैंक्शंस की योजना ने ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर डर पैदा कर दिया है। आमतौर पर तनाव के समय सोना 'सेफ-हेवन' माना जाता है, लेकिन फिलहाल मजबूत डॉलर के कारण निवेशक अपनी होल्डिंग्स में बढ़ोतरी करने के बजाय मुनाफावसूली (Profit Booking) को तरजीह दे रहे हैं।
चांदी की स्थिति
चांदी, सोना के मुकाबले थोड़ा अलग रुख दिखा रही है। सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से लगातार मिल रही इंडस्ट्रियल डिमांड ने इसे थोड़ा सपोर्ट दिया है, लेकिन यह भी व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक दबावों से अछूती नहीं है।
आगे क्या?
अब बाजार की पूरी नजर अमेरिकी लेबर मार्केट रिपोर्ट्स और नॉन-फार्म पेरोल्स के आंकड़ों पर है। ये नंबर्स तय करेंगे कि फेडरल रिजर्व सितंबर में क्या रुख अपनाता है। मिडिल ईस्ट से आने वाली खबरों के बीच शॉर्ट टर्म में बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।
