ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। अमेरिका द्वारा 'शैडो फ्लीट' टैंकरों पर से प्रतिबंध हटाने की संभावनाओं के बाद कीमतों पर दबाव बढ़ गया है, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अभी भी बरकरार है।
गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने क्षेत्रीय संघर्ष और अमेरिका की संभावित पॉलिसी बदलावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। ब्रेंट क्रूड $104.67 प्रति बैरल पर फिसल गया, जिसमें 1.31% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.07% गिरकर $94.07 पर आ गया।
नीतिगत बदलाव और फ्रेट कॉस्ट
अमेरिकी प्रशासन कथित तौर पर 'शैडो फ्लीट' (shadow fleet) जहाजों के खिलाफ अपनी प्रतिबंध नीति में बदलाव पर विचार कर रहा है। ये टैंकर अक्सर उन देशों से तेल ले जाते हैं जिन पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल फ्रेट कॉस्ट को कम करना है, जो सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेजी से बढ़ी है। यदि ये जहाज फिर से काम शुरू करते हैं, तो ईंधन परिवहन की लागत कम हो सकती है, जिससे ऊर्जा की कीमतों पर महंगाई का दबाव घटने की उम्मीद है।
जियोपॉलिटिकल रिस्क और समुद्री सुरक्षा
कीमतों में यह गिरावट होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के बावजूद आई है। पिछले कुछ दिनों में इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर सुरक्षा की स्थिति बिगड़ी है, जहां कंटेनर जहाज और ड्राई बल्क कैरियर को निशाना बनाया गया है। हालांकि, मार्केट इस समय इस बात का आकलन कर रहा है कि क्या प्रतिबंधों में ढील से मिलने वाली अतिरिक्त सप्लाई, इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के जोखिम को ऑफसेट कर पाएगी।
प्रोडक्शन और इन्वेंट्री का हाल
ताजा डेटा के अनुसार, 11.1 मिलियन बैरल की इन्वेंट्री में भारी कमी दर्ज की गई है, जो अनुमानों से अधिक है। बावजूद इसके, ट्रेडर्स सतर्क बने हुए हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, रूस और वेस्ट एशियन गल्फ में कच्चे तेल का प्रोडक्शन लगातार बढ़ रहा है, और रीजनल एक्सपोर्ट प्री-वॉर स्तर के लगभग 75% तक पहुंच गया है। अब निवेशकों की नजरें U.S. Energy Information Administration के आधिकारिक डेटा पर टिकी हैं, जो सप्लाई-डिमांड के सही समीकरण को स्पष्ट करेगा।
